नई दिल्लीः CEC Impeachment Motion Rejected मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति ने खारिज कर दिया है। सभापति ने ‘जजेज इंक्वायरी एक्ट, 1968’ की धारा 3 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था। इस पर राज्यसभा के 63 सांसदों और लोकसभा के 130 सांसदों के हस्ताक्षर थे। नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए कम से कम 50 राज्यसभा सांसद या 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं, जो इस प्रस्ताव में पूरे किए गए थे।
CEC Impeachment Motion Rejected मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह महाभियोग प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व में विपक्षी दलों द्वारा संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया था। प्रस्ताव का उद्देश्य ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना था। महाभियोग नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने, चुनावी धांधली की जांच को जानबूझकर प्रभावित करने और मतदाता सूची में गड़बड़ी करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और कुछ दलों के प्रति पक्षपात बरतने के आरोप भी लगाए गए थे। टीएमसी की ओर से दायर नोटिस में कुल सात प्रमुख आरोपों का उल्लेख किया गया था।
जानकारों के अनुसार, भारत में यह पहला अवसर है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, राज्यसभा सभापति द्वारा इसे खारिज किए जाने के बाद यह मामला आगे नहीं बढ़ सकेगा। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है, वहीं विपक्ष के अगले कदम पर भी नजरें टिकी रहेंगी।