रेलवे संघ का दावा: 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत लोको पायलट ने लगातार 12 घंटे से अधिक काम किया

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रेलवे संघ का दावा: 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत लोको पायलट ने लगातार 12 घंटे से अधिक काम किया

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 08:29 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 08:29 PM IST

(जीवन प्रकाश शर्मा)

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) रेलवे लोको पायलट के एक संघ ने दावा किया है कि भारतीय रेल में 8.85 प्रतिशत चालकों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगातार 12 घंटे से अधिक काम किया, जबकि उनमें से 46.96 प्रतिशत को कभी-कभी नौ घंटे से अधिक की अवधि के लिए तैनात किया गया।

रेलवे नियमों के अनुसार, किसी लोको पायलट को लगातार नौ घंटे से अधिक की पाली के लिए या कुल मिलाकर (ड्यूटी शुरू करने से लेकर समाप्त करने तक) 11 घंटे से अधिक के लिए तैनात नहीं किया जा सकता।

वर्ष 2021 से, रेलवे बोर्ड के सुरक्षा विभाग ने सभी क्षेत्रीय रेलवे को निर्देश दिया है कि 80 प्रतिशत फेरे नौ घंटे की समय सीमा के भीतर पूरे किए जाने चाहिए।

रेल मंत्रालय का कहना है कि वह लोको पायलट की कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए प्रयास कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में 15,873 सहायक लोको पायलट (एएलपी) की भर्ती की गई है, जबकि 20,000 से अधिक एएलपी की भर्ती प्रक्रिया जारी है।

‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ का कहना है कि रेलवे बोर्ड द्वारा रिक्तियों में कमी लाने और लोको पायलट के काम के घंटों की कड़ी निगरानी किये जाने के दावों के बावजूद, आंकड़े कुछ और ही दर्शाते हैं।

एसोसिएशन के महासचिव के. सी. जेम्स ने कहा, ‘‘हमने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लोको पायलट द्वारा की गई ड्यूटी की कुल संख्या का विश्लेषण किया और पाया कि लगभग नौ प्रतिशत लोको पायलट ने प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक काम किया, और 47 प्रतिशत ने प्रतिदिन नौ घंटे से अधिक काम किया।’’

उन्होंने कहा कि जहां भारतीय रेलवे माल ढुलाई में पिछले साल के रिकॉर्ड को पार करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के संचालन कर रहा है, वहीं आंकड़े बताते हैं कि इसका असली श्रेय परिचालन दल और सुरक्षा विभाग के अन्य कर्मियों को जाता है, जिनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने इसे संभव बनाया।

जेम्स ने कहा कि परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे बोर्ड को 2026-27 में 12 घंटे से अधिक की ड्यूटी तैनाती को काफी कम करने के लिए पहल करनी चाहिए।

उन्होंने रेलवे बोर्ड के पिछले साल के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि लोको पायलट को भोजन या शौच के लिए ‘ब्रेक’ देने के नियम बनाना परिचालन की दृष्टि से संभव नहीं है।

एसोसिएशन के क्षेत्र-वार आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्व तट रेलवे (ईसीआर), जो सभी 17 जोन में माल परिवहन में सबसे अधिक कमाई करता है, ने 23.80 प्रतिशत लोको पायलट को लगातार 12 घंटे से अधिक और 60.05 प्रतिशत को नौ घंटे से अधिक की पाली के लिए तैनात किया।

इस मामले में दक्षिण पूर्व रेलवे (एसईआर) दूसरे स्थान पर है। उसके दायरे में आने वाले 19.92 प्रतिशत लोको पायलट 12 घंटे से अधिक समय के लिए और 55.53 प्रतिशत नौ घंटे से अधिक समय के लिए तैनात किये गए।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश