असम में राजग को दो-तिहाई बहुमत, 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 पर जीती

असम में राजग को दो-तिहाई बहुमत, 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 पर जीती

असम में राजग को दो-तिहाई बहुमत, 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 पर जीती
Modified Date: May 5, 2026 / 12:49 am IST
Published Date: May 5, 2026 12:49 am IST

गुवाहाटी, चार मई (भाषा) असम में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने वाली है। राजग ने सोमवार को 126 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर जीत दर्ज की।

भाजपा ने 82 सीट पर जीत हासिल की जबकि उसके सहयोगी दलों बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीट पर जीत मिली है।

राज्य में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। इससे पहले 2021 और 2016 के चुनावों में उसने 60-60 सीटें जीती थीं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 मतों से हराकर लगातार छठी बार जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।

विपक्षी खेमे में कांग्रेस ने 19 सीट जीतीं जबकि बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले एआईयूडीएफ और अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले रायजोर दल ने दो-दो सीट हासिल कीं। तृणमूल कांग्रेस को एक सीट पर जीत हासिल हुई।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट में मौजूदा भाजपा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,181 मतों के अंतर से हार गए।

भाजपा के चुनाव जीतने वाले प्रमुख नेताओं में मंत्री अजंता नियोग (गोलाघाट), रानोज पेगु (धेमाजी), पीजूष हजारिका (जागीरोड), कौशिक राय (लखीपुर), प्रशांत फूकन (डिब्रूगढ़), कृष्णेंदु पॉल (पाथरकांडी) और बिमल बोरा (तिंगखोंग) शामिल हैं।

विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी ने यूपीपीएल के पूर्व बीटीसी प्रमुख प्रमोद बरो को हराकर तामुलपुर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।

रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने शिवसागर सीट बरकरार रखी, जबकि पार्टी के एक अन्य सदस्य महबूब मुख्तार ने ढिंग सीट जीती और तृणमूल कांग्रेस के शेरमन अली अहमद ने मंडिया से जीत हासिल की।

चुनाव हारने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया, असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति सैकिया और पूर्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रिपुन बोरा शामिल हैं।

राज्य की सभी 126 विधानसभा सीट पर नौ अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था।

भाषा शफीक सुभाष

सुभाष


लेखक के बारे में