असम के जोरहाट में राष्ट्रीय दलों का काफी कुछ लगा है दांव पर, पर चुनाव प्रचार यहां है गरिमापूर्ण
असम के जोरहाट में राष्ट्रीय दलों का काफी कुछ लगा है दांव पर, पर चुनाव प्रचार यहां है गरिमापूर्ण
(फाइल फोटो के साथ)
(दूर्बा घोष)
जोरहाट, छह अप्रैल (भाषा) असम विधानसभा चुनाव में जोरहाट निर्वाचन क्षेत्र में भले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच काफी कुछ दांव पर लगा है, लेकिन चुनाव प्रचार गरिमापूर्ण है।
इस सीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और भाजपा के वरिष्ठ मौजूदा विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी के बीच सीधा मुकाबला है।
इस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप गायब हैं। गोगोई और गोस्वामी दोनों ही मुख्य रूप से राजनीतिक रूप से जागरूक और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से अभिजात वर्ग के मतदाताओं से वोट मांगते हुए एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने से परहेज कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में पहली बार उतर रहे गोगोई को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया है। वह अपने चुनाव प्रचार में दावा करते हैं कि वह महाभारत के ‘अर्जुन’ के समान हैं जबकि गोस्वामी ‘भीष्म’ हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी का कहना है कि उनका एकमात्र लक्ष्य मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली ‘भ्रष्ट’ भाजपा सरकार को सत्ता से हटाना है।
कहा जाता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने उम्मीदवार के समर्थन में अपनी पूरी मशीनरी लगा दी थी उसके बावजूद, गोगोई आरामदायक अंतर से जीत गये थे। इसी जीत ने कांग्रेस का मनोबल बढ़ाया।
कांग्रेस ने गोगोई पर विश्वास व्यक्त करते हुए विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया तथा भाजपा, विशेष रूप से शर्मा को चुनौती दी, जबकि शर्मा ने गोगोई और उनकी पत्नी पर पाकिस्तान से संबंध होने के आरोप लगाए।
गोस्वामी ने जोरहाट के सांसद के आरोपों का विनम्रतापूर्वक जवाब देते हुए कहा, ‘‘वह हमारे सांसद हैं, जनता ने उन्हें चुना है… वह एक अच्छे वक्ता हैं। मैं उनके खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (गोगोई) भी मेरे खिलाफ कुछ नहीं कहा है… वह तीन बार सांसद रह चुके हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वह विधानसभा चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें पिछले दो वर्षों में अपने संसदीय क्षेत्र के लिए किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखना चाहिए।’’
गोस्वामी ने कहा कि वह भाजपा नेतृत्व के प्रति आभारी हैं कि उसने उन्हें लगातार तीसरी बार उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि वह ‘अगले पांच वर्षों के दौरान कुछ अधूरे कार्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।’
भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री द्वारा गोगोई और उनकी पत्नी के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ से कथित संबंधों के आरोपों पर टिप्पणी करने से भी इनकार कर दिया और कहा, ‘‘मैं एक वकील हूं और मैं सबूतों की जांच किए बिना कुछ नहीं कहना चाहता।’’
हालांकि, गोगोई का निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार सीमित है, क्योंकि वह राज्य भर में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए रैलियों को संबोधित कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि जोरहाट उनका गृह नगर है, जहां के लोगों के मन में उनके, उनके परिवार और पार्टी के प्रति अपार सद्भावना है।
गोगोई ने कई मौकों पर यह दावा किया है कि इस विधानसभा में लड़ाई ‘उनके पिता, दिवंगत तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली भाजपा’ की राजनीति के बीच है।
औपनिवेशिक विरासत वाला जोरहाट, गुवाहाटी के बाद राज्य का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण शहर माना जाता है और यहां मतदाताओं में जातिगत असमिया हिंदू, अहोम, चाय बागान मजदूर, मिसिंग जनजाति, स्वदेशी असमिया मुस्लिम आदि शामिल हैं।
इस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव मैदान में चार उम्मीदवार हैं, जिनमें आम आदमी पार्टी के प्रणब प्रियांकुष दत्ता और एसयूसीआई (सी) के हेमंत कुमार पेगु भी शामिल हैं।
असम की 126-सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे। वोटों की गिनती चार मई को होगी।
भाषा राजकुमार सुरेश
सुरेश

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