कर्नाटक में भाजपा ने किसानों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये सूखा राहत की मांग की

कर्नाटक में भाजपा ने किसानों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये सूखा राहत की मांग की

कर्नाटक में भाजपा ने किसानों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये सूखा राहत की मांग की
Modified Date: July 15, 2026 / 12:31 pm IST
Published Date: July 15, 2026 12:31 pm IST

बेंगलुरु, 15 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से मांग की है कि वह सूखा राहत के लिए उनकी सरकार द्वारा वास्तव में किए गए कार्यों का पारदर्शी ब्योरा उपलब्ध कराएं।

विजयेंद्र ने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री किसानों के लिए प्रति एकड़ 50,000 रुपये सूखा मुआवजा देने की घोषणा करें।

विजयेंद्र ने यह टिप्पणी शिवकुमार द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे उस पत्र के जवाब में की, जिसमें राज्य में सूखे की पैदा हो रही स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल भेजने का अनुरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के जरिए राज्य में बारिश में 30 प्रतिशत की कमी, मानसून में देरी और कृषि, पेयजल एवं जलाशयों के स्तर पर इसके प्रतिकूल प्रभाव का उल्लेख किया था।

शिवकुमार ने मोदी को लिखे पत्र में कहा था कि कर्नाटक ने सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं लेकिन केंद्र द्वारा जल्द जमीनी आकलन किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समय पर हस्तक्षेप से स्थिति से निपटने के राज्य के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

विजयेंद्र ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर कहा, ‘‘मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, आप सूखा पड़ने पर प्रधानमंत्री को केवल पत्र लिखने के बजाय जनता को यह बताइए कि आपने और आपकी सरकार ने सूखा राहत के लिए वास्तव में क्या किया है। क्या आप भूल गए कि कलबुर्गी में समीक्षा बैठक के दौरान आपने सूखे की स्थिति का अध्ययन करने के लिए मंत्रियों को नियुक्त करने की बात कही थी?’’

उन्होंने कहा कि राज्य में अब भी कोई पूर्णकालिक कृषि मंत्री नहीं है।

विजयेंद्र ने मंगलवार को कहा, ‘‘राजस्व मंत्री (उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर) तुमकुरु से आगे नहीं जा रहे। ग्रामीण विकास मंत्री ईश्वर खंड्रे वन विभाग की बातें कर रहे हैं और ग्राम पंचायतों के नाम बदलने में व्यस्त हैं। उद्योग मंत्री (एम. बी. पाटिल) कोलकाता में रोड शो कर रहे हैं। गृह मंत्री (प्रियंक खरगे) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में व्यस्त हैं। परिवहन मंत्री (बी सुरेश) बसों में घूम रहे हैं और नाटक कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि सिंचाई मंत्री (रामलिंगा रेड्डी) को अपने विभाग में कोई खास रुचि नहीं है।’’

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष ने दावा किया कि अंदरूनी संघर्षों के कारण प्रशासन ठप हो गया है और लोग यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि मंत्री सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए जिलों का दौरा कब करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘आप रियल एस्टेट कारोबार में व्यस्त हैं। जिलों में मंत्री मौजूद नहीं हैं और कर्नाटक विकास कार्यक्रम (केडीपी) की बैठकें भी नहीं हुई हैं।’’

विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री से ‘‘अपने रियल एस्टेट कारोबार के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान देने’’ का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘सूखा राहत दीजिए। प्रति एकड़ 50,000 रुपये सूखा मुआवजा दीजिए।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य की स्थिति को लेकर चिंतित है।

विजयेंद्र ने कहा, ‘‘केंद्रीय आकलन दल के आने तक कम से कम अंतरिम राहत दीजिए और सूखे का आकलन करने के लिए मंत्रियों को नियुक्त कीजिए। भगवान तिरुपति बालाजी आपको सद्बुद्धि दें।’’

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा


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