कठुआ में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 900 शरणार्थी परिवारों ने भूमि स्वामित्व अधिकार की मांग की

कठुआ में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 900 शरणार्थी परिवारों ने भूमि स्वामित्व अधिकार की मांग की

कठुआ में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 900 शरणार्थी परिवारों ने भूमि स्वामित्व अधिकार की मांग की
Modified Date: July 15, 2026 / 07:08 pm IST
Published Date: July 15, 2026 7:08 pm IST

जम्मू, 15 जुलाई (भाषा) देश के विभाजन के समय तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने भूमि पर मालिकाना हक यथाशीघ्र देने और एकमुश्त पुनर्वास योजना का लाभ देने की बुधवार को मांग की।

शरणार्थी समुदाय के सदस्यों ने दावा किया कि सैकड़ों पात्र परिवारों को अभी तक वह राहत नहीं मिली है जिसका सरकार ने वादा किया था।

ये मांगें पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी संगठन के अध्यक्ष लाभ राम गांधी की अगुवाई में यहां हुई एक बैठक के दौरान उठाई गईं।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘कठुआ में लगभग 902 पंजीकृत परिवारों को उन्हें आवंटित जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया गया है। हम प्रशासन से आग्रह करते हैं कि आवंटित भूमि और शत्रु संपत्तियों के लिए कानूनी मालिकाना हक के दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।’’

लाभ राम ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हाल की घटनाओं के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकी पर पड़ने वाले संभावित असर पर भी चिंता जताई और सरकार से शरणार्थी परिवारों के हितों की रक्षा करने की अपील की।

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी वे परिवार हैं जो 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बने इलाकों से आकर मुख्य रूप से जम्मू, कठुआ और राजौरी जिलों में बस गए थे।

भाषा धीरज खारी

खारी


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