राजस्थान में अलग-अलग कंपनियों की सात दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरी

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राजस्थान में अलग-अलग कंपनियों की सात दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरी

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  • Publish Date - April 23, 2026 / 12:29 AM IST,
    Updated On - April 23, 2026 / 12:29 AM IST

जयपुर, 22 अप्रैल (भाषा) राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग की जांच में अलग-अलग कंपनियों की सात दवाइयां मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

इन दवाओं में खांसी- जुकाम की सिरप, गले में संक्रमण, जीवाणु संक्रमण को खत्म करने वाली दवाइयां शामिल हैं।

औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने बताया कि मानकों पर खरी नहीं उतरी इन दवाइओं की खेप की बिक्री को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि एक से 15 अप्रैल के बीच अलग-अलग जगहों इन दवाइयों के नमूने लिए गए। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट हाल में आई है।

इसमें सात दवाइयों के नमूने मानकों पर खतरे नहीं उतरे।

अजय फाटक ने बताया कि मैसर्स लार्क लेबोरेट्रीज (इंडिया) लिमिटेड (भिवाड़ी) की बनाई ‘सेफिक्साइम ओरल सस्पेंशन’(लोरामिक्स सिरप) जीवाणु संक्रमण को खत्म करने में उपयोग आती है।

मैसर्स अफ्फी पेरेंटरल (सोनल, हिमाचल प्रदेश) की बनाई ‘एल्बेंडाजोल टैबलेट’, जो पेट में कीड़ों को खत्म करने में उपयोग ली जाती है।

मैसर्स डिजिटल मिशन और मैसर्स अक्कोवैल फार्मा प्रा.लि. की बनाई ‘एम्ब्रोक्सोल, लेवोसल्बुटामोल और गुआइफेनेसिन ड्रॉप्स’ (आईसटोकफ-एलएस) खांसी कम करने में उपयोग ली जाती है।

मैसर्स यूनाइटेड बायोस्युटिकल्स प्रा. लि. (हरिद्वार) की बनाई ‘मिथाइलप्रेडनिसोलोन टेबलैट’ (मिथाइलप्रेड्निसोलोन—4) जो सूजन कम करने, एलर्जी, गठियां रोग के इलाज में उपयोग की जाती है।

मैसर्स टक्सा लाइफसाइंसेज प्रा. लि. (मोहाली, पंजाब) की बनाई ‘डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन, क्लोरफेनिरामाइन’ (ओकुफ-डीएक्स) सूखी खांसी के इलाज में उपयोग किया जाता है। मैसर्स वीएडीएसपी फार्मास्युटिकल्स (बिद्दी, हिमाचल प्रदेश) की बनाई ‘सेफुरोक्सिम एसेटिल’ (एक्सटेंसिव-500) जीवाणु संक्रमण को खत्म करने के काम में आती है।

मैसर्स ओमेगा फार्मा (हरिद्वार) की बनाई ‘सिप्रोफ्लोक्सासिन 500’ ये एक प्रतिजैविक औषधि है।

भाषा बाकोलिया धीरज जितेंद्र

जितेंद्र