भारत में पक्षियों के खिड़कियों से टकराने की घटनाएं बढ़ रहीं : विशेषज्ञ
भारत में पक्षियों के खिड़कियों से टकराने की घटनाएं बढ़ रहीं : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) भारत में बढ़ते शहरीकरण और बुनियादी ढांचा विकास के साथ पक्षियों के खिड़कियों के शीशे से टकराने की घटनाएं बढ़ रही हैं। संरक्षणवादियों, पारिस्थितिकीविदों और वास्तुकारों के एक समूह ने मंगलवार को यह बात कही।
हालांकि, समूह ने माना कि इस मामले में आंकड़ों और अध्ययन की कमी है।
समूह ने कहा कि भारत में पक्षियों की ढेरों नस्लें पाई जाती हैं और देश वैश्विक स्तर पर पक्षियों के प्रमुख प्रवास मार्गों पर स्थित है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत में पक्षियों की आबादी में पहले से ही गिरावट देखी जा रही है और उनके खिड़कियों से टकराने की बढ़ती घटनाएं स्थिति को और भी बदतर बना सकती हैं।
भारत में पक्षियों के खिड़कियों से टकराने की घटनाओं पर आधारित पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की गई। संगोष्ठी का आयोजन विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) तिरुपति, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन, फेदर लाइब्रेरी और रेनमैटर फाउंडेशन ने किया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पक्षी खिड़कियों से इसलिए टकरा जाते हैं, क्योंकि वे उनमें लगे पारदर्शी शीशे को अवरोधक के रूप में नहीं देख पाते। उन्होंने बताया कि दिन के समय में पक्षी पेड़ों या आकाश के प्रतिबिंब को देखकर शीशे से टकरा सकते हैं, जबकि रात में तेज रोशनी उन्हें भ्रमित कर सकती है और वे शीशे को अवरोधक के रूप में नहीं देख पाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में इस तरह की टक्कर से हर साल औसतन एक अरब पक्षियों की मौत हो जाती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का कोई विश्लेषण नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों ने कहा कि 2025 में ‘ओर्निस हंगेरिका’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में एक साल में पक्षियों के खिड़कियों के शीशे से टकराने की 35 घटनाएं दर्ज की गईं। अध्ययन से पता चला कि ऐसी घटनाएं दो मंजिला इमारतों वाली दो जगहों पर घटीं, जिनमें 22 प्रजातियों के पक्षी शिकार बने।
वास्तुकार और संरक्षण विशेषज्ञ पीयूष सेखसरिया ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने पूरे भारत में पक्षियों के खिड़कियों के शीशे से टकराने की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की हैं। उन्होंने कहा, “इन दुर्घटनाओं में पक्षियों की लगभग 110 प्रजातियां शामिल थीं, जिनमें से 49 प्रवासी पक्षियों की थीं।”
आईआईएसईआर में जीव विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीवी रॉबिन ने कहा, “टक्कर की ज्यादातर घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब प्रवासी पक्षी उड़ान भरते समय आराम करने और कुछ खाने के लिए नीचे आते हैं।”
उन्होंने कहा कि खिड़की से टकराने पर पक्षियों के सिर में गंभीर चोट लग सकती है, उन्हें मस्तिष्क में रक्तस्राव, हड्डियां टूटने तथा आंतरिक रक्तस्राव की शिकायत हो सकती है और कई मामलों में उनकी जान तक जा सकती है।
विशेषज्ञों ने ऐसी घटनाओं को टालने के लिए खिड़कियों के शीशे पर पेंट करने, रंगीन परत चढ़ाने या अन्य सामग्री लगाने की सलाह दी है, ताकि पक्षी उन्हें अवरोधक के रूप में भांप सकें।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश

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