नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके ‘‘रास्ते का रोड़ा’’ कौन है और उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने अलग-अलग सीटों के बीच जनसंख्या के असंतुलन का हवाला देते हुए कहा कि यह परिसीमन से ही ठीक हो सकता है और विपक्ष को इसमें सहयोग करना चाहिए।
शाह ने कहा, ‘‘सबने (सदन में) बोला कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन जब बारीकी से देखें तो ‘इंडी’ गठबंधन के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके महिला आरक्षण का विरोध किया।’’
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर ये वोट नहीं देंगे तो महिला आरक्षण विधेयक गिर जाएगा, लेकिन देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों को प्रतिनिधित्व के संदर्भ में कोई नुकसान नहीं होगा।
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल… इन पांच राज्यों की लोकसभा की 543 सीटों में वर्तमान संख्या 129 है, जिसका प्रतिशत 23.76 बनता है। अब वृद्धि के बाद जब इन पांचों राज्यों को (सीटों का) आवंटन किया जाएगा, तो सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी। वहीं, (लोकसभा की प्रस्तावित कुल सीट संख्या) 816 में इसका प्रतिशत निकालेंगे, तो 23.87 प्रतिशत आएगा। (वर्तमान में) यह 23.76 प्रतिशत है जो अब 23.87 होगा। किसी का कोई नुकसान नहीं होगा।’’
शाह ने कहा, ‘‘यहां कुछ सदस्यों ने भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। मैं यहां संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं। भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है।’’
उन्होंने कहा कि ‘इंडी’ गठबंधन के लोग तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग करना चाहते हैं और ये संविधान की बात करते हैं।
शाह ने जाति जगनणना के संदर्भ में कहा, ‘‘जब से यह विधेयक आया है, विपक्ष ने कुछ भ्रांतियां फैलाना शुरू किया है कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार संविधान संशोधन लेकर आई है। मैं बताना चाहता हूं कि तीन माह पहले ही हम जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुके हैं, टालने का सवाल ही नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि जाति जनगणना शुरू हो चुकी है, उसका पहला चरण चल रहा है।
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वैभव हक
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