Women Reservation Bill Voting. Image Source- IBC24 Archive
नई दिल्लीः Women Reservation Bill Voting: महिला आरक्षण सहित तीन बिल को लेकर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। लोकसभा में यह बिल पास नहीं हो पाया है। बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में 489 सांसदों ने वोट डाले। बिलों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 489 का दो तिहाई 326 होता है। इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल पास 28 वोट से गिर गया। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू कहा कि कांग्रेस ने इस एतिहासिक क्षण को गंवाया। हम महिलाओं को अधिकार देकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि शेष दो बिल अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे। इसी के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
Lok Sabha Speaker Om Birla says, “The Constitution (131st Amendment) Amendment Bill did not pass as it did not achieve a 2/3 majority during voting in the House.” https://t.co/ucLnUltYnj pic.twitter.com/xcBUJ3RhAv
— ANI (@ANI) April 17, 2026
इससे पहले बिल पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘मैं समझ रहा हूं कि कांग्रेस वोट नहीं देंगे तो बिल गिर जाएगा। मगर इस देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं -बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। जब चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।’
Women Reservation Bill Voting: चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि यदि सदन सहमत हो तो वे 50 प्रतिशत लोकसभा सीटें बढ़ाने से संबंधित संशोधन बिल लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि आवश्यकता हो तो एक घंटे के लिए सदन की कार्यवाही रोककर भी इस पर कदम उठाया जा सकता है। इसी बीच कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने इस पर सवाल करते हुए सरकार की मंशा और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। वहीं, चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कई बार सदन में महत्वपूर्ण फैसले चर्चा के दौरान ही लिए जा सकते हैं, इसलिए इस मुद्दे पर सहमति बनाने की जरूरत है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस बहस में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार के आश्वासनों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। उन्होंने तंज करते हुए यह भी कहा कि अगर भाजपा लिखकर दे देंगे कि हम महिला प्रधानमंत्री बनाएंगे तो भी मैं इनपर भरोसा नहीं करूंगा।
संविधान संशोधन बिल के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को “ऑपरेशनलाइज” करने के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा 850 किया जाना था। महिलाओं के लिए 33 परसेंट आरक्षण को शामिल करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बाद कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं था बल्कि चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी। यह संविधान पर आक्रमण था। इसे हमने हरा दिया है।
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