Strait of Hormuz Reopens 2026 : ईरान-अमेरिका जंग में आया सबसे बड़ा मोड़, 49 दिन बाद खुला होर्मुज स्ट्रेट, अब क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

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49 दिनों बाद होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। इससे भारत समेत कई देशों को ईंधन संकट और महंगाई से राहत मिल सकती है।

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 08:09 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 08:42 PM IST

नई दिल्ली : Strait of Hormuz Reopens 2026  ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को करीब 49 दिनों के बाद दोबारा पूरी तरह से खोलने का फैसला किया है। अब इस रास्ते के खुलने से भारत समेत कई देशों में ईंधन की किल्लत खत्म होगी और महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।

सोशल मीडिया X पर दी जानकारी

दरअसल 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमले के बाद से ही इस रास्ते को बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की सप्लाई रुक गई थी। Iran US Conflict Update  अब इस रास्ते के खुलने से भारत समेत कई देशों में ईंधन की किल्लत खत्म होगी और महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि भले ही व्यापार के लिए मार्ग खुला है, लेकिन ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कि डील100% पूरी नहीं हो जाती।

49 दिनों का संकट और वैश्विक प्रभाव

28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान ने इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया था। 8 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा के बावजूद यह मार्ग पूरी तरह नहीं खुला था। आज 17 अप्रैल को यानी पूरे 49 दिनों के बाद यहाँ से आवाजाही सामान्य हुई है। आपकों बता दें की होर्मुज से रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20-21% हिस्सा है।

भारत में कैसे पड़ेगा असर ?

होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी खबर है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, जिसमें से 60% से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इस मार्ग के बंद होने से भारत में कतर और गल्फ देशों से आने वाली एलपीजी की भारी किल्लत हो गई थी। मार्ग खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी, जिससे भारत को बढ़ते आयात बिल और Inflation से राहत मिलेगी।

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