नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी की बीजिंग यात्रा के दौरान भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
यह चर्चा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के उस साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है कि दोनों देश विकास के मार्ग पर साझेदार हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया।
मिसरी सोमवार से चीन की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने चीन के कई नेताओं के साथ बातचीत की है, जिनमें उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान भी शामिल हैं।
पिछले कुछ महीनों में, नयी दिल्ली और बीजिंग ने अपने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई उपायों की घोषणा की, जो पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सीमा गतिरोध के दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हो गए थे।
जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की और दोनों नेताओं (मोदी और शी) के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया कि भारत और चीन एक-दूसरे के साझेदार हैं तथा एक-दूसरे के लिए विकास के अवसर उपलब्ध कराते हैं।’’
भारत और चीन द्वारा नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर से शुरू करने के निर्णय पर जायसवाल ने कहा, ‘‘यह एक ऐसा विषय है जिस पर पिछले वर्ष दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी। अगस्त 2025 में, दोनों पक्ष तीन निर्धारित व्यापारिक मार्गों — लिपुलेख दर्रा, शिपकी ला दर्रा और नाथू ला दर्रा-के माध्यम से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे।’’
कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के निकट कई टकराव वाले स्थानों से अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया था।
भाषा देवेंद्र नरेश
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