नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) यह मंगलवार भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि देश में प्राकृतिक पोलियोवायरस का आखिरी मामला सामने आने के 15 साल पूरे हो गए हैं।
भारत का पोलियो के गढ़ से टीकाकरण के क्षेत्र में वैश्विक तौर पर अग्रणी बनने का सफर विशेषज्ञों द्वारा राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामुदायिक स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की जीत के रूप में सराहा जा रहा है।
भारत में 2009 में पोलियो के 741 मामले दर्ज किए गए थे, जो उस समय वैश्विक कुल मामलों का 60 प्रतिशत था। लेकिन, संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण, देश में दो साल से भी कम समय में पोलियो का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। आखिरी मामला 2011 में सामने आया था।
‘इंटरनेशनल पीडियाट्रिक एसोसिएशन’ के कार्यकारी निदेशक और 2025 के ‘गोलकीपर चैंपियन’ पुरस्कार विजेता डॉ. नवीन ठक्कर ने कहा, ‘भारत में अंतिम पोलियो मामले के दर्ज होने के पंद्रह साल बाद, यह हमें याद दिलाता है कि यहां तक पहुंचने के लिए कितने असाधारण प्रयास करने पड़े। अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने हर समुदाय में विश्वास जगाया और देश ने इतने बड़े पैमाने पर टीके वितरित किए, जिसकी कुछ ही लोगों ने कल्पना की थी।’
उन्होंने कहा कि यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्मूलन संभव है।
इस अभियान की सफलता एक व्यापक वार्षिक अभियान पर आधारित थी, जिसके तहत पोलियो रोधी टीके की लगभग 100 करोड़ खुराक 17.2 करोड़ बच्चों तक पहुंचाई गई।
यह उपलब्धि कई बड़ी चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई, जिनमें 100 करोड़ से अधिक की आबादी, खराब स्वच्छता और दूरस्थ समुदायों तक पहुंचने में कठिनाई आदि शामिल थी।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लापरवाही के प्रति आगाह किया है। प्राकृतिक पोलियोवायरस केवल दो देशों में ही स्थानिक बना हुआ है, लेकिन पोलियोवायरस के विभिन्न रूपों का प्रकोप वैश्विक स्तर पर उन क्षेत्रों में लगातार उभर रहा है जहां टीकाकरण की दर कम है। ये ‘विभिन्न’ मामले तब उत्पन्न होते हैं जब कमजोर टीकाकृत वायरस कम प्रतिरक्षित आबादी में फैलता है और विकसित होता है।
भारत अब वैश्विक उन्मूलन के अंतिम प्रयास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई, विश्व में ‘नोवेल ओरल पोलियो वैक्सीन टाइप 2’ का उत्पादन करने वाले केवल दो निर्माताओं में से एक है, जो इस प्रकार के प्रकोपों को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
भाषा राजकुमार पवनेश
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