भारत ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया, आत्मघाती ड्रोन किसी पहाड़ी से टकरा गया होगा: पूर्व सीडीएस
भारत ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया, आत्मघाती ड्रोन किसी पहाड़ी से टकरा गया होगा: पूर्व सीडीएस
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की किराना हिल्स को ‘‘निशाना नहीं बनाया’’ – जहां कथित तौर पर एक परमाणु प्रतिष्ठान है बल्कि सरगोधा की ओर कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे और इनमें से एक अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद नीचे गिरकर एक पहाड़ी से टकरा गया होगा।
जनरल चौहान (सेवानिवृत्त) ने यहां ‘ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात’ पर हुई बातचीत के दौरान अपनी बात स्पष्ट करते हुए एयर मार्शल ए.के. भारती का भी समर्थन किया। एयर मार्शल भारती ने पिछले साल 12 मई को वायुसेना के ‘वायु संचालन महानिदेशक (डीजीएओ) के तौर पर पत्रकारों से कहा था, ‘‘हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है, चाहे वहां कुछ भी रहा हो।’’
एयर मार्शल भारती 31 जुलाई को उप वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनसे सोशल मीडिया पर फैली उन अफवाहों के बारे में पूछा गया जिनमें कहा गया था कि भारत ने जवाबी कार्रवाई के दौरान ‘किराना हिल्स’ नाम की जगह पर हमला किया था, जहां कथित तौर पर परमाणु हथियार भंडारण केंद्र था।
भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
चौहान ने कहा, ‘‘एयर मार्शल भारती से किराना हिल्स के बारे में एक सवाल पूछा गया था। मुझे लगता है कि मुझे इस बारे में साफ तौर पर बताना चाहिए। कई बार यह पूछा गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला किया गया था; क्योंकि वहीं पर उनके (पाकिस्तान के) परमाणु ठिकाने हैं।’’
उन्होंने कहा कि एयर मार्शल भारती ने तब ‘‘सही कहा था कि हमने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था।’’
पूर्व सीडीएस ने कहा, ‘‘मैं शायद कुछ हद तक समझा सकता हूं… उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा में कई ड्रोन भेजे थे, और किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है। तो ये ड्रोन उन राडार को ढूंढ रहे थे जो सरगोधा और उसके आस-पास थे। इसकी एक समय-सीमा होती है, जिसका मतलब है कि ये लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराते रहते हैं, और अगर कोई लक्ष्य नहीं मिलता, तो ये नीचे आकर कहीं टकरा जाते हैं।”
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि वह आकर उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया हो। इसलिए यह उन वजहों में से एक हो सकता है जिनके बारे में लोगों ने पूछा… क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने कुछ ऐसी तस्वीरें भी दिखाई थीं जिनमें किराना पहाड़ियों से धुआं निकलता दिख रहा था।’’
चौहान ने यह भी बताया कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 29 अप्रैल को हुई बैठक में यह तय किया गया था कि ‘‘हमें पाकिस्तान को एक बड़ा सबक सिखाना चाहिए’’ और इसके लिए ‘‘अकल्पनीय’’ कदम उठाना चाहिए, क्योंकि भारत सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसे खत्म करना जरूरी है।
चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को निर्देश दिया था कि ‘‘इसे अपने समय पर करें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि विफलता की कोई गुंजाइश न हो’’ और ‘‘हमारे पास सबूत होने चाहिए।’’
उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े अहम फैसले इसी महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए थे, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान बहावलपुर के लक्ष्य को खास तौर पर सूची में इसलिए शामिल किया गया था और हमले के लिए रात का समय इसलिए चुना गया ताकि आम नागरिकों को कम से कम नुकसान हो।
यह पहली बार है जब जनरल चौहान ने उस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी सार्वजनिक की है। यह बैठक मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाये गए सैन्य अभियान से कुछ दिन पहले हुई थी।
चौहान ने बताया कि रक्षा बलों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इसका फैसला 29 अप्रैल को लिया गया था। उस समय सीडीएस, तीनों सेना प्रमुखों, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘23 से 29 अप्रैल के बीच हमारे बीच कई बैठकें हुईं। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी की चार-पांच बार बैठक हुई और इतनी ही बार एनएसए के साथ भी बैठकें हुईं। हम सरकार के पास गए… हमारे पास कई विकल्प थे जिन पर हमने एनएसए के साथ चर्चा की थी।’’
जनरल चौहान (सेवानिवृत्त) ने बताया कि 29 अप्रैल की बैठक में ही बहावलपुर के लक्ष्य को भी सूची में शामिल किया गया था। यह रक्षा मंत्री के ज़ोर देने पर किया गया था, क्योंकि प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘‘हमें कुछ बड़ा करना है।’’
भाषा सुभाष सिम्मी
सिम्मी

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