भारत बाघ संरक्षण, वन्यजीवों के पुनरुद्धार का वैश्विक मॉडल बना: पर्यावरण मंत्रालय

भारत बाघ संरक्षण, वन्यजीवों के पुनरुद्धार का वैश्विक मॉडल बना: पर्यावरण मंत्रालय

भारत बाघ संरक्षण, वन्यजीवों के पुनरुद्धार का वैश्विक मॉडल बना: पर्यावरण मंत्रालय
Modified Date: July 28, 2026 / 09:21 pm IST
Published Date: July 28, 2026 9:21 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि दुनिया के कुल बाघों में से लगभग 70 प्रतिशत भारत में पाए जाते हैं, जो दशकों से चले आ रहे निरंतर नीतिगत समर्थन, वैज्ञानिक प्रबंधन और समुदाय की भागीदारी को दर्शाता है।

इसने कहा कि भारत में 2006 के बाद से बाघों की वैज्ञानिक रूप से गणना की गई संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है और भारत के बाघ संरक्षण प्रयास अब दुनियाभर में वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने के एक उदाहरण के रूप में देखे जा रहे हैं।

मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस से एक दिन पहले कहा, ‘‘अखिल भारतीय बाघ आकलन (2022) के अनुसार भारत में बाघों की संख्या 3,682 है। वर्ष 2022 के अखिल भारतीय बाघ आकलन में 20 राज्यों को शामिल किया गया और 6.41 लाख किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया।’’

इसने यह भी कहा कि भारत की बाघ संरक्षण संबंधी नीतिगत रूपरेखा दीर्घकालिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर निरंतर संस्थागत समर्थन के साथ जोड़ती है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और बाघ संरक्षण योजनाओं के जरिये बाघों के प्रवास के लिए एक मजबूत और विज्ञान-आधारित शासन व्यवस्था का ढांचा प्रदान किया जा रहा है।’’

इसने बताया कि ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के जरिये बाघों की मौजूदगी वाले 18 राज्यों में 58 बाघ अभयारण्यों का एक नेटवर्क स्थापित किया गया है।

भाषा

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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