भारत में जून-अगस्त के बीच 30 दिन खतरनाक गर्मी झेलने वालों की संख्या सबसे अधिक: विश्लेषण

भारत में जून-अगस्त के बीच 30 दिन खतरनाक गर्मी झेलने वालों की संख्या सबसे अधिक: विश्लेषण

भारत में जून-अगस्त के बीच 30 दिन खतरनाक गर्मी झेलने वालों की संख्या सबसे अधिक: विश्लेषण
Modified Date: September 16, 2026 / 08:53 pm IST
Published Date: September 16, 2026 8:53 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) जून से अगस्त के बीच जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी खतरनाक गर्मी का कम से कम 30 दिनों तक सामना करने वाले लोगों की संख्या भारत में दुनिया में सबसे अधिक रही और करीब 11.7 करोड़ लोग इससे प्रभावित हुए। एक नये विश्लेषण में यह जानकारी दी गई।

विश्लेषण में ‘जोखिम वाले गर्म दिनों’ को उन दिनों के रूप में माना गया है, जब तापमान उस जगह के सामान्य तापमान की तुलना में बहुत ज्यादा हो। इसके लिए 1991 से 2020 के बीच उस इलाके में दर्ज तापमानों को आधार बनाया गया है।

वैज्ञानिकों और संचारकों के एक स्वतंत्र समूह ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ द्वारा बुधवार को जारी ‘रिस्की हीट ऐडेड बाय क्लाइमेट चेंज: जून टू अगस्त 2026’ नामक विश्लेषण के अनुसार, 1991-2020 के औसत की तुलना में इस वर्ष जून और अगस्त के बीच भारत सामान्य से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म था।

इसमें यह भी सामने आया है कि इस गर्मी के मौसम में भारत के एक आम नागरिक ने औसतन लगभग 39 ऐसे दिन बिताए, जब तापमान जलवायु परिवर्तन से काफी अधिक प्रभावित था।

इसमें यह भी कहा गया है कि मुंबई में सबसे अधिक 86 ऐसे दिन रहे।

विश्लेषण के अनुसार, श्रीनगर में ऐसे जोखिम भरे 53 गर्म दिन दर्ज किए गए। इसके बाद चेन्नई (40 दिन), राजकोट (29 दिन), अमृतसर (29 दिन) और लखनऊ (27 दिन) का स्थान रहा।

दुनिया भर में जून और अगस्त के बीच 1.5 अरब से अधिक लोगों ने जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ी हुई खतरनाक गर्मी का सामना 30 या उससे अधिक दिनों तक किया।

विश्लेषण के अनुसार, खतरनाक गर्मी का सामना करने वाली सबसे अधिक आबादी एशिया में रही। इस दौरान महाद्वीप की आबादी के 58 प्रतिशत लोग कम से कम 30 दिनों तक खतरनाक गर्मी की चपेट में रहे।

भाषा प्रचेता माधव शफीक

शफीक


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