रक्षा आयातक से निर्यातक बना भारत: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ
रक्षा आयातक से निर्यातक बना भारत: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ
नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने सोमवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत भारत रक्षा क्षेत्र में आयातक से निर्यातक बन गया है और दुनिया उसकी प्रगति देखकर हैरान है।
सेठ ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय में 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ-साथ करीब 17,000 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप तंत्र अब रक्षा क्षेत्र से जुड़ चुका है।
सेठ ने कहा, ‘एक समय था, जब लोग कहते थे कि हमें हथियारों का आयात करना चाहिए। अब ऐसा नहीं है। भारत अब आयातक नहीं रहा, बल्कि निर्यातक बन गया है।’
उन्होंने कहा, ‘‘करीब 10-12 साल पहले हमारा रक्षा निर्यात केवल 600 करोड़ रुपये का था। आज यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है और हमारा लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।’
उन्होंने कहा कि एक समय भारत अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह विदेशी हथियारों पर निर्भर था, लेकिन आज देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए सेठ ने कहा कि इस अभियान ने रक्षा विनिर्माण में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया के सामने इस नयी ताकत को प्रदर्शित किया। 1947 के बाद भारत ने कई युद्ध लड़े हैं, लेकिन यह अभियान एक नयी तरह की प्रतिक्रिया का प्रतीक था।’
उन्होंने कहा, ‘इसने स्वदेशी हथियारों की ताकत दिखाई। अपने देश में विकसित रक्षा प्रणालियों के इस्तेमाल से हमने कुछ ही घंटों में पाकिस्तान की क्षमताओं को कम कर दिया। दुनिया ने भारत की बढ़ती सैन्य ताकत देखी।’
सेठ ने दावा किया कि भारतीय सशस्त्र बल दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति बन गए हैं और भारत आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘आज का भारत अपने हथियार खुद बनाता है। वह अपनी सुरक्षा करता है। वह अपना भविष्य खुद लिखता है। आत्मनिर्भर भारत केवल एक अभियान नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा की नयी ढाल है। स्वदेशी केवल नीति नहीं, बल्कि भारत का आत्मसम्मान है।’
सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का उल्लेख करते हुए मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीमावर्ती गांवों के प्रति दृष्टिकोण बदलने का श्रेय दिया।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ये भारत के आखिरी गांव नहीं, बल्कि भारत के पहले गांव हैं। आज लुटियन दिल्ली जैसी सड़कों का नेटवर्क सीमा क्षेत्रों तक पहुंच गया है।’ उन्होंने दुर्गम इलाकों में रणनीतिक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की भी सराहना की।
वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए सेठ ने कहा कि देश उन जवानों के बलिदान का ऋण कभी नहीं चुका सकता, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कहा कि पार्टी कई वर्षों से कारगिल विजय दिवस पर सैनिकों के सम्मान और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और ‘तिरंगा यात्राएं’ आयोजित की हैं, ताकि हर नागरिक देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प ले। हम अपने वीर सैनिकों और शहीदों के घर जाकर उनके परिवारों का सम्मान भी करते हैं।’
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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