भारत ने सबसे बड़े ऊर्जा संकट में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया: मोदी

Ads

भारत ने सबसे बड़े ऊर्जा संकट में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया: मोदी

  •  
  • Publish Date - July 4, 2026 / 03:28 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 03:28 PM IST

पचपदरा (राजस्थान), चार जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत ने अपनी बेहतर नीतियों, ईंधन आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के दम पर दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया तथा इसका बोझ देश के नागरिकों पर बहुत कम पड़ा।

मोदी ने पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े। उन्होंने कहा कि देशवासी इस मुश्किल समय में जिस तरह से देश के साथ मजबूती से खड़े रहे, देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है।

राजस्थान दौरे पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया। साथ ही उन्होंने एक लाख पांच हजार करोड़ रुपए के विभिन्न कार्यों का ऑनलाइन तरीके से शिलान्यास/उद्घाटन और लोकार्पण किया।

इस मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा संकट के दौरान बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।

मोदी ने कहा कि व्यक्ति और देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो।

उन्होंने रिफाइनरी के उद्घाटन का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘आज का दिन साक्षी है कि भाजपा सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन-रात एक कर देते हैं।’’

रिफाइनरी में दो महीने पहले हुए अग्निकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना भी परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण है।

मोदी ने कहा, ‘‘आप सभी ने दिखा दिया है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न तो पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।’’

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन 21वीं सदी के इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं।’’

मोदी ने कहा कि इस संकट के दौरान भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए… संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई और भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत की ‘डिप्लोमेटिक पावर’ का सकारात्मक इस्तेमाल किया गया और तब जाकर भारत सकंट से उबर पाया है।’’

उन्होंने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई। उन्होंने कहा, ‘‘जब यह संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ईंधन का आयात करता था लेकिन संकट के समय भारत की कूटनीति का जलवा दिख गया और दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। ‘नागरिक देवो भवः’ हमारा मंत्र है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी। उन्होंने कहा, ‘‘बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए। लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।’’

मोदी ने कहा, ‘‘जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे हैं, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे। वे आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।’’

भाषा पृथ्वी बाकोलिया

देवेंद्र

देवेंद्र