नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरीं : धर्मेंद्र प्रधान

नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरीं : धर्मेंद्र प्रधान

नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरीं : धर्मेंद्र प्रधान
Modified Date: January 6, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: January 6, 2026 4:54 pm IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि भारतीय भाषाएं एकता की शक्ति हैं और नष्ट किए जाने के प्रयासों के बावजूद ये समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं।

प्रधान ने यह बात भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में 55 पुस्तकों का विमोचन करते हुए कही, जिनमें सांकेतिक भाषा में तिरुक्कुरल की व्याख्या भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी भाषाएँ एकता की शक्ति हैं। भारतीय भाषाएँ समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं, भले ही उन्हें नष्ट करने के प्रयास किए गए हों। भारत लोकतंत्र की जननी है और साथ ही भाषाई विविधता से समृद्ध देश भी है। यह हमारा दायित्व है कि हम अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक संपदा का संरक्षण करें और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में जागरूक करें।’’

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मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

प्रधान ने शास्त्रीय भाषाओं-कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओडिया के उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित 41 साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया।

मंत्री ने केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) की 13 पुस्तकों के साथ-साथ तिरुक्कुरल की सांकेतिक भाषा में व्याख्या करने वाली 45 कड़ियों की एक श्रृंखला का भी विमोचन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, तमिल और सांकेतिक भाषा में ये साहित्यिक कृतियाँ भारत की भाषाई विरासत को शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक गौरव के केंद्र में रखने के हमारे व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का एक हिस्सा हैं।’’

प्रधान ने कहा, ‘‘अनुसूचित भाषाओं की सूची में और अधिक भाषाओं को शामिल करने से लेकर भारतीय भाषाओं में शास्त्रीय ग्रंथों के अनुवाद और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित करने तक, हमारी सरकार ने सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से कार्य किया है।’’

भाषा

नेत्रपाल मनीषा

मनीषा


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