भारतीय महिलाएं किसी शहजादे के इंतजार में नहीं हैं: रोहना गेरा

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भारतीय महिलाएं किसी शहजादे के इंतजार में नहीं हैं: रोहना गेरा

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  • Publish Date - November 24, 2020 / 11:07 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:13 PM IST

(बेदिका)

नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) निर्देशक रोहना गेरा का कहना है कि उनकी पहली फिल्म “इज लव एनफ? सर” एक प्रेम कहानी के रूप में ही बननी थी।

गेरा की फिल्म में दिखाया गया है कि भारत में वर्ग किसी व्यक्ति को किस प्रकार प्रभावित करता है।

फिल्म को 2018 के कान फिल्म महोत्सव में दिखाया गया था और इसे गैन फॉउंडेशन पुरस्कार मिला था।

भारत में 13 नवंबर को रिलीज होने से पहले यह फिल्म दुनिया के 25 देशों में प्रदर्शित की जा चुकी है।

तिलोत्तमा शोम और विवेक गोम्बर अभिनीत इस फिल्म को मार्च में रिलीज होना था लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते योजना में परिवर्तन करना पड़ा।

हालांकि, गेरा ने फिल्म को भारत में रिलीज करने का निश्चय कर लिया था।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह प्रेम कहानी पर ही आधारित फिल्म बनाना चाहती थीं, निर्देशक ने कहा, “बिलकुल। मैंने इसे प्रेम कहानी के रूप में ही लिखना शुरू किया था।”

“सर” की कहानी एक विधवा घरेलू सहायिका रत्ना और अमेरिका से लौटे उसके नियोक्ता अश्विन के बीच पनपने वाले प्यार के कोमल अहसास के इर्द गिर्द बुनी गई है।

गेरा ने कहा कि एक महिला होकर महिला के बारे में लिखने पर यह महत्वपूर्ण था कि वह रत्ना के चरित्र को किसी असहाय के तौर पर नहीं एक विकसित व्यक्तित्व के रूप में दिखाएं।

उन्होंने कहा कि रत्ना कोई सिंड्रेला नहीं है जो अपनी रिहाई के लिए किसी शहजादे में इंतजार में है।

जूम पर दिए साक्षात्कार में गेरा ने पीटीआई-भाषा से कहा, “मैं सिंड्रेला के बारे में बिलकुल नहीं सोच रही थी। यह मेरे दिमाग में कहीं नहीं था। रत्ना की अपनी आशाएं और सपने हैं जिनके लिए वह प्रयास करती है। वह किसी के द्वारा बचाए जाने के इंतजार में नहीं है और मैं भारतीय महिलाओं को ऐसे ही देखती हूं। हम ऐसी व्यवस्था में हैं जो जरूरी नहीं कि दुनिया में सबसे न्यायपूर्ण हो।”

उन्होंने कहा कि “सर” फिल्म का विचार उनके दिमाग में तब आया जब उन्होंने भारतीय समाज में गहरे तक पैठ बना चुके वर्ग विभाजन को देखा।

“सर” में गीताजंलि कुलकर्णी, अहमरीन अंजुम और राहुल वोहरा ने भी अभिनय किया है।

भाषा यश नरेश

नरेश