भारत में सुनने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए प्रथम एकीकृत सहायता मॉडल का समझौता किया गया

भारत में सुनने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए प्रथम एकीकृत सहायता मॉडल का समझौता किया गया

भारत में सुनने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए प्रथम एकीकृत सहायता मॉडल का समझौता किया गया
Modified Date: March 12, 2026 / 09:16 pm IST
Published Date: March 12, 2026 9:16 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) सरकार ने सुनने में अक्षम व्यक्तियों के लिए समर्थन और अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न संगठनों के एक संघ (कंसोर्टियम) के साथ बृहस्पतिवार को समझौता किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने सुनने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए सशक्तीकरण और अवसरों को तेज करने के लिए ‘‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’’ के साथ साझेदारी की है।

सचिव वी विद्यावती, अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में नयी दिल्ली में सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

बयान में कहा गया है कि इस साझेदारी का उद्देश्य सशक्तीकरण के एक एकीकृत जीवन-चक्र मॉडल का नेतृत्व करना है, जो श्रवण-बाधित व्यक्तियों को प्रारंभिक हस्तक्षेप और शिक्षा से लेकर कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक समावेश तक सहायता प्रदान करता है।

इसमें कहा गया है, ‘‘संस्थानात्मक विशेषज्ञता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक पहुंच को एक साथ लाकर, यह पहल ऐसे प्रणालीगत बदलाव लाने का प्रयास करती है जो देशभर में सुनने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए पहुंच को बेहतर बनाए, अवसरों का विस्तार करे और उनकी गरिमा व स्वतंत्रता को मजबूत करे।’’

बयान के अनुसार, यह सहयोग सहायक प्रौद्योगिकियों के विस्तार, शैक्षिक सहायता को मजबूत करने, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने, छात्रवृत्ति की सुविधा प्रदान करने और भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने एवं डिजिटल सामग्री विकसित करने पर केंद्रित होगा।

इसमें कहा गया है कि नीतिगत समर्थन को तकनीकी समाधानों और समुदाय-संचालित पहलों के साथ मिलाकर, इस साझेदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुनने में अक्षम व्यक्ति सामाजिक और आर्थिक जीवन में पूरी तरह और आत्मविश्वास से भाग ले सकें।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश


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