संसदों के लिए जवाबदेह एआई विकसित करने में मनुष्यों का संस्थागत ज्ञान अहम : हरिवंश

संसदों के लिए जवाबदेह एआई विकसित करने में मनुष्यों का संस्थागत ज्ञान अहम : हरिवंश

संसदों के लिए जवाबदेह एआई विकसित करने में मनुष्यों का संस्थागत ज्ञान अहम : हरिवंश
Modified Date: January 15, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: January 15, 2026 10:20 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने बृहस्पतिवार को विधायिकाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग को आकार देने में मनुष्यों की संस्थागत स्मृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एआई का विधायिका में इस्तेमाल करना है, तो उसे जवाबदेह, प्रासंगिक और भरोसेमंद बनना होगा।

हरिवंश ने यहां राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में संसद में एआई के इस्तेमाल पर आयोजित कार्यशाला में कहा कि संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सत्य पर आधारित होनी चाहिए, नैतिकता से बंधी होनी चाहिए, मानवीय निर्णय द्वारा निर्देशित होनी चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए।

 ⁠

उन्होंने भारतीय संसद के कुशल कामकाज के लिए विकसित किए जा रहे विभिन्न डिजिटल और एआई उपकरणों की सूची भी दी।

राज्यसभा के उपसभापति ने एआई के विकास के लिए ‘हाइब्रिड’ दृष्टिकोण की आवश्यकता को संदर्भित करते हुए कहा, ‘‘जब मनुष्य किसी नए संगठन में प्रवेश करता है, तो वह अपने साथ दो आवश्यक गुण लेकर आता है – कौशल और ज्ञान।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कौशल अर्जित किया जा सकता है, स्थानांतरित किया जा सकता है या आउटसोर्स किया जा सकता है, लेकिन ज्ञान प्रासंगिक होता है और संस्था में गहराई से समाहित होता है।’’

हरिवंश ने कहा, ‘‘संसदीय ज्ञान अद्वितीय होता है, क्योंकि यह दशकों से चर्चाओं, निर्णयों, परंपराओं एवं संवैधानिक प्रथाओं से निर्मित होता है। यही सिद्धांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी समान रूप से लागू होता है।’’ उन्होंने कहा कि संसदों के लिए जवाबदेह एआई विकसित करने में मनुष्यों का संस्थागत ज्ञान का केंद्रीय महत्व है।’’

उपसभापति ने कहा, ‘‘मानवीय निगरानी एवं हस्तक्षेप की क्षमता व्यवस्था का अभिन्न अंग होना चाहिए। बिना संयम के नवाचार जोखिम भरा होता है, जबकि नवाचार के बिना संयम से ठहराव हो सकता है।’’

उन्होंने कहा कि इसलिए संसद को इन दोनों के बीच सावधानीपूर्वक एवं सोच-समझकर संतुलन स्थापित करना चाहिए।

हरिवंश ने संसद में पहले से हो रहे एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी देते हुए दस्तावेजों के अनुवाद, संसदीय चर्चाओं का विश्लेषण एवं 22 भाषाओं में प्रश्नों को तैयार करने का उल्लेख किया।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में