चंडीगढ़, 21 जून (भाषा) जापान में चल रहे ‘अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव’ के दौरान रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जापानी नागरिकों, भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के सदस्यों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, योग अभ्यास, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की शिक्षाओं के माध्यम से इस कार्यक्रम ने भारत-जापान मैत्री और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का एक सशक्त संदेश दिया।
जापान में 19 से 23 जून तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 आयोजित किया जा रहा है।
इस महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार को जापान की संसद के सदस्यों, प्रमुख राजनेताओं, विद्वानों और भारत-जापान मैत्री के समर्थकों को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां भेंट करके की गई।
रविवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का एक विशेष वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया।
सैनी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि योग भारत की एक अमूल्य विरासत है, जिसने आज पूरी दुनिया को स्वास्थ्य, संतुलन और शांति का मार्ग दिखाया है।
उन्होंने जापान में आयोजित गीता महोत्सव की भी तारीफ़ की और आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई दी।
मशहूर आध्यात्मिक गुरु स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि योग सिर्फ़ शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और वैश्विक सद्भाव का रास्ता है।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया, जो तनाव, चिंता और संघर्ष से जूझ रही है, उसमें योग और श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश बहुत ज़रूरी और प्रासंगिक है।
महोत्सव में हरियाणा सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिकारी अमित अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार योग और गीता को दुनिया भर में बढ़ावा देने और फैलाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के जरिये भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर के अलग-अलग देशों तक पहुंचाया जा रहा है।
जापान के कई शहरों में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में जापानी नागरिकों ने हिस्सा लिया।
योग और ध्यान के प्रति जापान के लोगों की गहरी रुचि भारत की आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति बढ़ते आकर्षण का सबूत है।
इस कार्यक्रम के दौरान खास मेहमान योगमाता केइको आइकावा को सम्मानित किया गया।
उन्होंने भारत में आयोजित महाकुंभ में भी हिस्सा लिया था और भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी।
उन्होंने योग और ध्यान के जरिये विश्व शांति और मानव कल्याण पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपराएं पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और जापान में योग और ध्यान के प्रति बढ़ती रुचि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मज़बूत करेगी।
भाषा
सुरेश अविनाश
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