जांच एजेंसियां ​​बैंक खातों से लेन-देन रोकने के मामले में मनमानी नहीं कर सकतीं: उच्च न्यायालय

जांच एजेंसियां ​​बैंक खातों से लेन-देन रोकने के मामले में मनमानी नहीं कर सकतीं: उच्च न्यायालय

जांच एजेंसियां ​​बैंक खातों से लेन-देन रोकने के मामले में मनमानी नहीं कर सकतीं: उच्च न्यायालय
Modified Date: February 19, 2026 / 07:12 pm IST
Published Date: February 19, 2026 7:12 pm IST

प्रयागराज (उप्र), 19 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि साइबर धोखाधड़ी मामलों की पड़ताल कर रहीं जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक खातों से लेन-देन रोकने के मामले में कोई भेदभाव या मनमानी नहीं की जा सकती है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े बैंक खातों से लेन-देन रोकने के संबंध में अधिकारियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया की जांच कर रही है।

तारकेश्वर तिवारी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने कहा, ‘‘हमारे समक्ष विभिन्न रिट याचिकाओं से पता चलता है कि बैंकों ने खातों से लेन-देन रोक दिया है और जब ग्राहक उनसे संपर्क करते हैं, तो उन्हें केवल यह सूचित किया जाता है कि खाते पुलिस अधिकारियों या साइबर अपराध थाने द्वारा दिए गए पत्र पर फ्रीज कर दिए गए हैं।’’

पीठ ने कहा, हालांकि, पिछली तारीखों पर विशिष्ट निर्देशों के बावजूद आज तक उक्त पत्रों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया है।

अदालत ने केंद्र सरकार को ऐसी चिंताओं को दूर करने का निर्देश दिया और कहा कि विभिन्न अदालती फैसलों के बावजूद प्रक्रियात्मक विसंगतियां अब भी मौजूद हैं।

दस फरवरी को दिए आदेश में, अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक हलफनामे के माध्यम से मुद्दों से निपटने का संकल्प जताया है।

मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।

भाषा सं जफर

शफीक

शफीक


लेखक के बारे में