अधिवक्ता पर हमले के मामले में जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी जाए: न्यायालय

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अधिवक्ता पर हमले के मामले में जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी जाए: न्यायालय

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 01:56 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 01:56 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में एक वरिष्ठ अधिवक्ता पर हमले से जुड़े मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दें।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शरीर के अहम अंगों पर लगी चोट का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्राथमिकी में हत्या की कोशिश की धारा भी शामिल की जानी चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘ इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 और 118 को जोड़ा जाए। चूंकि स्थानीय पुलिस की जांच को लेकर आरोप हैं, हम पुलिस आयुक्त को निर्देश देते हैं कि वे मामले को अपराध शाखा को सौंप दें।’’

बीएनएस की धारा 109 हत्या के प्रयास से संबंधित है जबकि धारा-118 स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से जुड़ी है।

न्यायालय ने इससे पहले पुलिस से जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब की थी और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि अधिवक्ता पंकज शर्मा की जान और स्वतंत्रता को कोई खतरा न हो।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सदस्य शर्मा के साथ 11 जुलाई को उनके घर पर हमलावरों ने कथित तौर पर मारपीट की थी और उनके सिर पर आठ टांके लगाने पड़े थे।

सिंह ने बताया कि शर्मा ने घर में जबरन दाखिल होने और मारपीट करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन अगले ही दिन हमलावर वापस आए और उन्हें धमकाया। उन्होंने कहा कि अगर उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता के साथ ऐसा हो सकता है, तो देश में आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे।

शर्मा की ओर से दायर रिट याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता यह रिट याचिका इसलिए दायर कर रहा है क्योंकि 11 जुलाई, 2026 को उस पर नृशंस तरीके से हमला किया गया था, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं और आठ टांके लगाने पड़े।

याचिका में आरोप लगाया गया, ‘‘दिल्ली पुलिस उस आरोपी के प्रभाव में है जो एक स्थानीय नेता का करीबी है। पुलिस न तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर रही है और न ही याचिकाकर्ता को सुरक्षा दे रही है, जबकि आरोपी ने 12 जुलाई को फिर से याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों पर हमला करने की कोशिश की थी।’’

एससीबीए ने तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने, जांच किसी उपयुक्त एजेंसी को सौंपने, शर्मा और उनके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने और हमले में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत