ईरान युद्ध तेल की वजह से हो रहा है, न कि सभ्यता को नष्ट करने के लिए : आरएसएस महासचिव होसबाले
ईरान युद्ध तेल की वजह से हो रहा है, न कि सभ्यता को नष्ट करने के लिए : आरएसएस महासचिव होसबाले
(विजय जोशी)
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहा युद्ध सभ्यतागत संघर्ष नहीं है, बल्कि इसकी वजह तेल है। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्रों और नेताओं की सद्बुद्धि जगाने में भूमिका निभा सकता है।
होसबाले ने ‘पीटीआई’ के साथ वीडियो साक्षात्कार में कहा कि युद्ध आम तौर पर दुष्ट मानसिकता या राष्ट्रों या व्यक्तियों के लालच एवं अहंकार का परिणाम होते हैं।
जब होसबाले से पूछा गया कि क्या उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर है, तो उन्होंने न में जवाब दिया।
आरएसएस महासचिव ने कहा, “मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने किसी का नाम नहीं लिया।”
यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल का हमला परमाणु हथियारों को लेकर है या फिर किसी सभ्यता को नष्ट करने के लिए है, जैसा कि ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में धमकी दी थी, तो इसपर होसबाले ने कहा, “युद्ध, लड़ाइयां, झड़पें और संघर्ष विश्व के संपूर्ण इतिहास में दुनिया के हर हिस्से में हमेशा से होते रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “युद्ध आमतौर पर मन में जन्म लेते हैं। जब मैं स्कूल में था, तब ‘युद्ध बुरी चीज है’ शीर्षक वाला एक पाठ था। वह बुरी चीज एक दुष्ट मानसिकता के कारण पैदा होती है।”
होसबाले ने कहा, “जब आप किसी ऐसी चीज पर कब्जा करना चाहते हैं, जो आपकी नहीं है, या आप बहुत लालची हो जाते हैं, या किसी राष्ट्र, समाज या नेतृत्व में ऐसी कोई प्रवृत्ति विकसित हो जाती है, तो युद्ध छिड़ जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि यह भले ही तेल के लिए युद्ध है, लेकिन पहले ही भविष्यवाणी की जा चुकी है कि अगला संघर्ष पानी को लेकर हो सकता है।
होसबाले ने कहा, “इसका मतलब यह है कि अगर यह युद्ध खत्म हो जाता है, तो हमें पानी को लेकर अगले युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, “युद्ध मानवता को खत्म नहीं करेंगे, लेकिन ये निश्चित रूप से मानव जीवन को बदल देंगे।”
आरएसएस में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले होसबाले ने कहा कि प्रख्यात विचारक डॉ. सैमुअल हंटिंगटन ने सभ्यताओं के बीच युद्ध की भविष्यवाणी की थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह (ईरान युद्ध) वैसा युद्ध नहीं है।
होसबाले ने कहा कि पूरा ईसाई जगत एक देश के साथ नहीं खड़ा है और सभी मुस्लिम राष्ट्र एक छतरी के नीचे नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर भारत राष्ट्रों और नेताओं की सद्बुद्धि को जगाने में भूमिका निभा सकता है।
खर्चों में कटौती की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए आरएसएस महासचिव ने कहा कि यह देश के हित में है। उन्होंने कहा कि युद्ध न होने पर भी सादगी और मितव्ययिता भारतीय जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए।
होसबाले ने कहा, “यह वह बुनियादी चीज है, जिसका हमें पालन और अभ्यास करना चाहिए। संकट और चुनौतियों के समय में इसे आत्मसात करना और अमल में लाना जरूरी है।”
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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