डूसू चुनाव से पहले 10 हजार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की घोषणा, एनएसयूआई और अभाविप में तकरार

डूसू चुनाव से पहले 10 हजार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की घोषणा, एनएसयूआई और अभाविप में तकरार

डूसू चुनाव से पहले 10 हजार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की घोषणा, एनएसयूआई और अभाविप में तकरार
Modified Date: September 16, 2026 / 05:43 pm IST
Published Date: September 16, 2026 5:43 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के बीच बुधवार को दिल्ली सरकार द्वारा 10,000 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाने की घोषणा को लेकर तकरार हुई। एनएसयूआई ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव से ठीक पहले की गई इस घोषणा के समय पर सवाल उठाया।

एनएसयूआई ने प्रस्तावित छात्रावासों के स्थान, उन्हें तैयार करने की समयसीमा, बजट, शुल्क ढांचे और पात्रता मानदंड समेत अन्य विवरण मांगे तथा सवाल किया कि सुरक्षित और किफायती छात्रावास के मुद्दे पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया।

यह घोषणा डूसू चुनाव के लिए मतदान से दो दिन पहले और सत्य निकेतन में ‘पेइंग गेस्ट’ आवास की सुविधा प्रदान करने वाली पांच मंजिला इमारत के ढहने के कुछ दिन बाद की गई। इस हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि सरकार को बिना विवरण के घोषणा करने के बजाय एक ‘पारदर्शी और समयबद्ध योजना’ पेश करनी चाहिए।

जाखड़ ने सवाल किया, ‘‘अब डूसू चुनाव में मतदान से ठीक दो दिन पहले सरकार ने 10,000 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाने की घोषणा की है। ये छात्रावास कहां बनाए जाएंगे? इन्हें लागू करने की समयसीमा क्या है? इसके लिए कितना बजट आवंटित किया गया है? शुल्क ढांचा क्या होगा और पात्रता किस आधार पर तय की जाएगी?’’

जाखड़ ने कहा कि संगठन प्रस्तावित छात्रावासों के खिलाफ नहीं है बल्कि वह इस घोषणा के समय, पारदर्शिता और इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहा है।

एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि घोषणा का समय इस सवाल को जन्म देता है कि क्या यह कदम डूसू चुनाव से पहले विद्यार्थियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से उठाया गया है?

आलोचनाओं का जवाब देते हुए अभाविप की दिल्ली इकाई के प्रदेश सचिव सार्थक शर्मा ने एनएसयूआई पर छात्र आवास के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

शर्मा ने कहा, ‘‘सत्य निकेतन हादसे के समय मलबे पर हथौड़ा चलाकर रील बनाने से लेकर अब 10,000 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की घोषणा पर सवाल उठाने तक, कांग्रेस-एनएसयूआई ने बार-बार विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण करने की कोशिश की है।”

उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने पहले छात्रावासों की कमी का मुद्दा उठाया था और अब वह विद्यार्थियों की इस मांग को पूरा करने के उद्देश्य से लिए गए फैसले पर सवाल उठा रहा है।

शर्मा ने कहा, “कांग्रेस-एनएसयूआई को यह जवाब देना चाहिए कि क्या वह वास्तव में विद्यार्थियों की आवास संबंधी समस्या का समाधान चाहती है या केवल राजनीतिक उद्देश्यों से इस मुद्दे को बनाए रखना चाहती है।’’

शर्मा ने छात्रावास के मुद्दे पर कांग्रेस के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया और पूछा कि पार्टी ने दशकों तक दिल्ली में शासन करने के दौरान पर्याप्त संख्या में सुरक्षित और सुलभ छात्रावास सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए।

भारतीय युवक कांग्रेस (आईवाईसी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में विद्यार्थियों, विशेष रूप से दिल्ली से बाहर से आने वाले युवाओं के लिए बेहतर, सुरक्षित और किफायती छात्रावास सुविधाओं की मांग को लेकर बुधवार को एक विरोध मार्च निकाला।

आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब इस मार्च में शामिल हुए और विद्यार्थियों से संवाद भी किया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली आने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा एक बुनियादी जरूरत है और उन्हें अत्यधिक किराए या असुरक्षित माहौल की चिंता नहीं होनी चाहिए।

चिब ने कहा, ‘सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को घोषणाबाजी बंद करके काम करना शुरू करना चाहिए। हर छात्र सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक आवास पाने का हकदार है।’

उन्होंने कहा कि छात्रावासों की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र हो रहे हैं, जिन्हें अपनी पारिवारिक आय का एक बड़ा हिस्सा निजी आवास (पीजी या किराए के कमरों) पर खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए प्रचार बुधवार को समाप्त हो रहा है। डूसू चुनाव के लिए मतदान 18 सितंबर को होगा, जबकि मतगणना 19 सितंबर को की जाएगी।

भाषा सुमित नरेश

नरेश


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