इसरो जासूसी : चार लोगों को अग्रिम जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 11 मार्च को सुनवाई

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इसरो जासूसी : चार लोगों को अग्रिम जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 11 मार्च को सुनवाई

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  • Publish Date - February 25, 2022 / 07:09 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:01 PM IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 11 मार्च को सुनवाई करेगा जिसमें 1994 के इसरो जासूसी मामले में वैज्ञानिक नंबी नारायणन को कथित रूप से फंसाने के मामले में एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहित चार लोगों को अग्रिम जमानत दी गई थी।

केरल उच्च न्यायालय ने पिछले साल 13 अगस्त को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) साजिश मामले में तीन पूर्व पुलिस अधिकारियों आर. बी श्रीकुमार, एस. विजयन तथा टी एस दुर्गा दत्त और खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पी. एस. जयप्रकाश को अग्रिम जमानत दी थी।

श्रीकुमार उस समय खुफिया ब्यूरो के उपनिदेशक थे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ को बताया कि उन्हें कुछ समय चाहिए क्योंकि मामले में अदालत की मदद कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू कुछ व्यक्तिगत समस्या में हैं और कुछ दस्तावेजों का अभी भी इंतजार है।

मेहता ने पीठ को बताया, ‘‘मुझे कुछ वक्त चाहिये। श्री राजू (एएसजी) मामले में सहायता कर रहे हैं। उनकी ओर से कुछ व्यक्तिगत समस्या है और कुछ दस्तावेजों की प्रतीक्षा है।’’

उन्होंने उच्चतम न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि मामले में 11 मार्च को सुनवाई की जायेगी।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय से कहा था कि अग्रिम जमानत मिलने से मामले की जांच पटरी से उतर सकती है।

सीबीआई ने कहा था कि उसने अपनी जांच में पाया है कि इस मामले में कुछ वैज्ञानिकों को प्रताड़ित किया गया और फंसाया गया जिसके कारण क्रायोजेनिक इंजन का निर्माण प्रभावित हुआ और इसके कारण भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगभग एक या दो दशक पीछे चला गया।

सीबीआई ने जासूसी मामले में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन की गिरफ्तारी और हिरासत के संबंध में आपराधिक साजिश सहित विभिन्न कथित अपराधों के लिए 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

नारायणन, जिन्हें सीबीआई द्वारा क्लीन चिट दी गई थी, ने पहले कहा था कि केरल पुलिस ने मामले को ‘‘गढ़ा’’ था और 1994 के मामले में जिस तकनीक को चुराने और बेचने का आरोप लगाया गया था, वह उस समय भी मौजूद नहीं थी।

सीबीआई ने अपनी जांच में कहा था कि नारायणन की गैर कानूनी ढंग से गिरफ्तारी के लिए केरल के तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे।

भाषा

देवेंद्र उमा

उमा