असम में अवैध रूप से रह रहे मिया समुदाय का नाम हटाना भाजपा का कर्तव्य : हिमंत
असम में अवैध रूप से रह रहे मिया समुदाय का नाम हटाना भाजपा का कर्तव्य : हिमंत
धेमाजी/ढकुआखाना/गुवाहाटी, सात जनवरी (भाषा) विशेष पुनरीक्षण के (एसआर) के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में ‘अनियमितताओं’ के आरोपों के बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेशियों और ‘‘अवैध रुप से रह रहे मिया समुदाय’’ के लोगों के नाम हटाने के लिए एक सही सूची तैयार करना ‘भाजपा का एजेंडा’ है।
एसआर के बाद 30 दिसंबर को प्रकाशित प्रदेश की मसौदा मतदाता सूची के अनुसार राज्य में मतदाताओं की संख्या में 1.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
शर्मा ने संवाददताओं से बातचीत में कहा, ‘‘सही मतदाता सूची भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा है। नहीं तो, हमने मतदाता सूची से बांग्लादेशियों के नाम हटाने के लिए क्या किया है। यह छिपाने की कोई बात नहीं है कि बांग्लादेशियों से ज़मीन वापस लेना हमारा एजेंडा है।’’
एक राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब राइजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया ने पार्टी नेताओं को 60 विधानसभा क्षेत्रों से 10,000 वैध ‘‘भाजपा विरोधी मतदाताओं’’ के नाम हटाने का निर्देश दिया है, हालांकि इस आरोप को सत्ताधारी पार्टी ने खारिज कर दिया है।
शर्मा ने कहा, ‘‘यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम यह देखें कि अवैध रूप से रहने वाले मिया समुदाय के लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो। यह देखना हमारा कर्तव्य है कि हमारी जमीनें अवैध मिया समुदाय के कब्ज़े में न हों। लोगों ने हमें इन्हीं कामों को करने के लिए वोट दिया था।’’
‘मिया’ मूल रूप से असम में बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है और गैर-बांग्लाभाषी लोग आम तौर पर उन्हें बांग्लादेशी अप्रवासी मानते हैं। हाल के सालों में, इस समुदाय के कार्यकर्ताओं ने विरोध के तौर पर इस शब्द को अपनाना शुरू कर दिया है।
गोगोई के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा, ‘‘अखिल गोगोई बहुत मनोरंजन करते हैं, और उन्हें नियमों का पता नहीं है। आप (पत्रकार) दिन भर के काम के बाद रात में उनका संवाददाता सम्मेलन और फेसबुक लाइव देखें, आपको मनोरंजन मिलेगा।’’
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संदिग्ध नागरिक है, तो हर भारतीय नागरिक निर्वाचन आयोग के सामने फॉर्म नंबर 6, 7 और 8 भरकर शिकायत कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन नाम अपने आप नहीं हटाए जाएंगे। पहले नोटिस भेजा जाएगा और जवाब दाखिल किया जाएगा। हर राजनीतिक दल बूथ-लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करती है ताकि वह मतदाता सूची में सुधार में मदद कर सके।’’
उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति मर गया है, तो उसका नाम हटा दिया जाएगा। अगर किसी के दो जगह नाम हैं, तो एक जगह से नाम हटा दिया जाएगा।
शर्मा ने कहा, ‘‘नहीं तो, राहुल गांधी आरोप लगाएंगे कि नाम दो जगहों पर थे। इसीलिए सही मतदाता सूची हर राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी है। मैं कांग्रेस से भी अपील करूंगा कि वे मृत लोगों के नाम हटाने में सरकार की मदद करें।’’
इस बीच, सैकिया ने गुवाहाटी में एक संवाददाता सम्मेलन में गोगोई पर जमकर हमला बोला और विपक्षी नेता द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया ।
लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘अखिल गोगोई में कोई नैतिक या राजनीतिक ताकत नहीं है। वह लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सही और बिना गलती वाले मतदाता सूची की मांग लोकतंत्र के लिए जायज और जरूरी है।’’
उन्होंने असम जातीय परिषद (एजेपी) के प्रमुख लुरिनज्योति गोगोई पर अवैध प्रवासियों के प्रति ‘‘बहुत अधिक सहानुभूति’’ रखने का आरोप लगाया और कहा कि अखिल गोगोई की भी यही सोच है।
भाजपा नेता ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का नाम भी उनके साथ जोड़ते हुए कहा कि तीनों नेताओं की सोच ‘‘खतरनाक’’ है जो राज्य को नुकसान पहुंचा सकती है।
अखिल गोगोई के अनुसार, दिलीप सैकिया ने चार जनवरी की शाम को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में कथित तौर पर असम के मंत्री अशोक सिंघल को 60 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों में ‘सुधार’ करने का निर्देश दिया था, जिसका मकसद मतदाता सूची से योग्य मतदाताओं के नाम हटाना था।
कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में ‘‘गंभीर गड़बड़ियों’’ का दावा कर रही है।
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर मांग की है कि जब तक सभी ‘‘अनियमितताओं की पूरी तरह से जांच और समाधान’’ नहीं हो जाता, तब तक मतदाता सूची को अंतिम रुप देने की प्रक्रिया रोक दी जाए, ताकि किसी भी ‘‘अनधिकृत या अज्ञात’’ मतदाता को हटाया जा सके।
मसौदा सूची में कुल 2,52,01,624 मतदाता हैं, जो जनवरी 2025 में प्रकाशित पिछली अंतिम सूची से 1.35 प्रतिशत ज़्यादा हैं।
पिछले साल छह जनवरी से 27 दिसंबर तक कुल 7,86,841 नाम जोड़े गए और 4,47,196 नाम हटाए गए।
विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान, 4,78,992 मृत मतदाताओं की और स्थान परिवर्तन करने वाले 5,23,680 मतदाताओं की पहचान की गई। इसके अलावा 53,619 ऐसी प्रविष्टियां भी मिलीं, जिनमें एक ही मतदाता के नाम कई बार हैं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा कि इन नामों को अभी तक हटाया नहीं गया है। इन्हें हटाने या शिफ्ट करने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब मौजूदा दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान औपचारिक आवेदन मिलेंगे।
दावे और आपत्तियां 27 दिसंबर से 22 जनवरी तक दाखिल की जा सकती हैं। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन दस फरवरी को किया जायेगा।
भाषा रंजन रंजन वैभव
वैभव

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