पुरी का जगन्नाथ मंदिर बुधवार शाम ‘श्रीमुख शृंगार’ अनुष्ठान के लिए रहेगा बंद

Ads

पुरी का जगन्नाथ मंदिर बुधवार शाम ‘श्रीमुख शृंगार’ अनुष्ठान के लिए रहेगा बंद

  •  
  • Publish Date - July 29, 2026 / 03:09 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 03:09 PM IST

पुरी, 29 जुलाई (भाषा) ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर बुधवार शाम को ‘बनकलागी नीति’ अनुष्ठान हेतु पांच घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा।

‘बनकलागी नीति’ एक गुप्त अनुष्ठान है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के चेहरों को प्राकृतिक रंगों से फिर से सजाया जाता है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘बुधवार (29 जुलाई, 2026) को आषाढ़ शुक्ल (व्यास पूर्णिमा) तिथि के अवसर पर देवी-देवताओं की ‘बनकलागी नीति’ संपन्न की जाएगी। इसलिए दूसरी भोग मंडप सेवा पूरी होने के बाद शाम छह बजे से रात 11 बजे तक सार्वजनिक दर्शन अस्थायी रूप से निलंबित रहेंगे।’’

‘बनकलागी’ को ‘श्रीमुख शृंगार’ भी कहा जाता है। यह अनुष्ठान पारंपरिक रूप से बुधवार या बृहस्पतिवार को किया जाता है। इस दौरान 12वीं शताब्दी के इस मंदिर के सभी द्वार बंद रहते हैं। ‘दत्त महापात्र’ नामक विशेष सेवादारों का एक समूह ‘रत्न सिंहासन’ पर जाकर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के चेहरों का फिर से शृंगार है।

लगभग चार से पांच घंटे तक चलने वाले इस अनुष्ठान में केवल प्राकृतिक और जैविक रंगों के साथ कस्तूरी, कपूर और केसर जैसी सुगंधित सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है।

सेवादारों के अनुसार, भगवान बलभद्र के चेहरे के लिए सफेद रंग शंख के चूर्ण से तैयार किया जाता है, जबकि देवी सुभद्रा के लिए पीला रंग ‘हरिताल’ (आर्सेनिक ट्राइसल्फाइड का एक रूप) से और भगवान जगन्नाथ के लिए काला रंग ‘हिंगुल’ (पारे का लाल सल्फाइड) से तैयार किया जाता है। रंगों की चमक और सुगंध बढ़ाने के लिए इनमें केसर और कपूर मिलाया जाता है।

इस अनुष्ठान को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि वार्षिक रथ यात्रा के दौरान बारिश और नमी के संपर्क में आने से देवी-देवताओं के चेहरों का रंग प्रभावित होता है या फीका पड़ जाता है।

इस वर्ष रथ यात्रा उत्सव 24 जुलाई को संपन्न हुआ था।

भाषा

प्रचेता नरेश

नरेश