रांची के बंगाली समुदाय ने सुभाष चंद्र बोस पर भाजपा सांसद की ‘अपमानजनक’ टिप्पणी का विरोध किया

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रांची के बंगाली समुदाय ने सुभाष चंद्र बोस पर भाजपा सांसद की ‘अपमानजनक’ टिप्पणी का विरोध किया

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 08:48 PM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 08:48 PM IST

रांची, 20 सितंबर (भाषा) बंगाली समुदाय के सदस्यों ने यहां विरोध प्रदर्शन किया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए पश्चिम बंगाल से भाजपा के राज्यसभा सदस्य नागेंद्रनाथ रॉय के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सदस्य महुआ मांझी ने रांची के लालपुर चौक से थारपाखना रोड स्थित यूनियन क्लब तक निकाली गई विरोध रैली में हिस्सा लिया और कहा कि बंगाली समुदाय नेताजी का कोई भी अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।

अनंत महाराज के नाम से भी चर्चित रॉय ने नेताजी को “युद्ध अपराधी” बताते हुए भारत की आजादी की लड़ाई में उनके नेतृत्व और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाए थे। रॉय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में कूच बिहार से हैं और राजबंशी समुदाय के नेता हैं।

इन टिप्पणियों से नाराज, ‘बांग्ला सांस्कृतिक कर्मिब्रिंदो’ के बैनर तले बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोगों ने रवींद्रनाथ टैगोर के गीत गाते हुए एक रैली निकाली। इस विरोध मार्च का मुख्य आकर्षण एक विंटेज कार थी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर बोस ने 1940 में झारखंड के रामगढ़ जिले में एक बैठक में शामिल होने के लिए किया था।

मांझी ने कहा, “भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनंत महाराज ने बार-बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं, उन्हें युद्ध अपराधी कहा और आजाद हिंद फौज पर सवाल उठाए। रांची का बंगाली समुदाय नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।”

रैली के संयोजक सुबीर लाहिड़ी ने कहा कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक रॉय को गिरफ्तार नहीं किया जाता और वह सांसद पद से इस्तीफा नहीं दे देते।

अपमानजनक टिप्पणियों के बाद, पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने रॉय को दिए गए राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ को पिछले महीने वापस ले लिया और रद्द कर दिया।

बंगाल के मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे सोशल मीडिया पर नेताजी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ गिरफ्तारी समेत सख्त कार्रवाई करें और उनका कहना था कि कानून सांसदों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगा।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश