जयराम रमेश ने अशोक चिन्ह और ‘सत्यमेव जयते’ को अंगीकार किए जाने को याद किया

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जयराम रमेश ने अशोक चिन्ह और ‘सत्यमेव जयते’ को अंगीकार किए जाने को याद किया

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 01:19 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 01:19 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अशोक चिह्न और आदर्श वाक्य के रूप में ‘सत्यमेव जयते’ को अंगीकार किए जाने को याद किया।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज से 76 वर्ष पहले भारत का संविधान लागू हुआ था.. रोहित डे और ऑर्निट शानी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “असेंबलिंग इंडिया’ज़ कॉन्स्टिट्यूशन : ए न्यू डेमोक्रेटिक हिस्ट्री” का विशेष उल्लेख किया जाना चाहिए। संविधान की पहली दो हस्तलिखित प्रतियों अंग्रेज़ी और हिंदी के आवरण पर भी राष्ट्रीय प्रतीक अंकित था। 1947 के अंत तक यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ में 1905 में पहली बार उत्खनित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष होगा।’’

उनका कहना है कि 1949 की शुरुआत में ही अशोक स्तंभ के नीचे मुंडक उपनिषद से लिया गया वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में जोड़ा गया।

रमेश ने कहा, ‘‘कुछ लोगों का कहना था कि इसे ‘सत्यमेव जयति’ होना चाहिए, न कि ‘सत्यमेव जयते’। इस पर प्रतिष्ठित संस्कृत और अन्य विद्वानों से परामर्श किया गया, जिन्होंने सहमति दी कि सही रूप ‘सत्यमेव जयते’ ही है।’’

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा