नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने रविवार को कहा कि अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका में विविधता को लेकर दिए गए अपने विचारों पर वास्तव में विश्वास करते हैं तो उन्हें नफरत फैलाने वालों से खुले तौर पर दूरी बनाकर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
भागवत ने अमेरिका में एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं रहेगा। भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है।
इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत के एक गुट के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने सवाल किया कि अगर ऐसा है तो आरएसएस ऐसे लोगों को बाहर क्यों नहीं करता।
मदनी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ये लोग आखिर कौन हैं जो मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं, भीड़ द्वारा हत्या और हिंसा का समर्थन करते हैं, आर्थिक व सामाजिक बहिष्कार की अपील करते हैं, मस्जिदों, मदरसों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाते हैं और मुसलमानों की नागरिकता तथा संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाते हैं? आरएसएस ने अब तक इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है?”
मदनी ने कहा, “अमेरिका में एकता, भाईचारे और सभी धर्मों के सम्मान की बात करना सराहनीय है, लेकिन आज इस संदेश की वास्तविक जरूरत भारत में है।”
उन्होंने कहा कि अगर मोहन भागवत वास्तव में इस विचार को अमल में लाना चाहते हैं तो उन्हें नफरत फैलाने वालों से खुले तौर पर दूरी बनानी चाहिए और उन लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि यह साबित हो सके कि यह केवल विदेश में दिया गया बयान नहीं है।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश