झारखंड: आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने सरकार पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया

झारखंड: आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने सरकार पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया

झारखंड: आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने सरकार पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया
Modified Date: August 22, 2026 / 04:08 pm IST
Published Date: August 22, 2026 4:08 pm IST

रांची, 22 अगस्त (भाषा) झारखंड में परीक्षा रद्द करने के फैसले पर उच्च न्यायालय की रोक के बाद शनिवार को भर्ती परीक्षा के आंदोलनकारी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी गई और उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर उच्च न्यायालय में परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का मजबूती से बचाव नहीं करके उनके साथ ‘धोखा’ करने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर छात्रों के हितों को लेकर ‘दोहरा रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया। वहीं, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आरोप लगाया कि भाजपा छात्रों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रही है।

झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिन तक चले आंदोलन के बाद 22 नौकरी परीक्षाएं रद्द करने और 23 अन्य की जांच के आदेश दिए थे। इससे आंदोलन तो समाप्त हुआ, लेकिन परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों ने अलग विरोध शुरू कर दिया। इनमें से कई अभ्यर्थियों ने नौकरी जाने की आशंका जताते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाएं रद्द करने संबंधी कई अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी।

इसके बाद परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी फैल गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के सदस्यों ने शुक्रवार को यहां झारखंड लोक सेवा आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला और पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई।

इसी तरह के प्रदर्शन हजारीबाग और गिरिडीह में भी हुए।

प्रदर्शनकारियों ने अल्बर्ट चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने की भी कोशिश की। वे नौकरी परीक्षाओं में ‘अनियमितताओं’ और उच्च न्यायालय में सरकार द्वारा अपने फैसले का प्रभावी बचाव नहीं करने को लेकर विरोध जता रहे थे।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने रांची, हजारीबाग और गिरिडीह में कथित कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

मरांडी ने कहा, ‘‘झामुमो-कांग्रेस सरकार झारखंड के गरीब, दलित और आदिवासी छात्रों की नौकरियां बेचने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुई। उनके संघर्ष को कमजोर करने के लिए उन्होंने मतभेद पैदा करने, दबाव बनाने और परीक्षाएं रद्द करने का दिखावा करने की कोशिश की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी, छात्रों के सामने आपका दोहरा रवैया उजागर होगा। ये छात्र आपके और हेमंत सोरेन की तरह विरासत के उत्तराधिकारी नहीं हैं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।’’

वहीं, झामुमो ने भाजपा पर भर्ती परीक्षा से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा ‘‘झारखंड के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने पर तुली हुई है’’ और छात्रों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रही है।

‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ ने भी सरकार की न्यायालय में पैरवी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि याचिकाओं का प्रभावी तरीके से विरोध करने के लिए वरिष्ठ विधि अधिकारी मौजूद नहीं थे।

जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 24 अगस्त से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार 15 सितंबर को उच्च न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखती है तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जा सकता है।

भाषा शोभना पवनेश

पवनेश


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