झारखंड परीक्षा विवाद: नौकरी पर मंडराते संकट के बीच अभ्यर्थियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया

झारखंड परीक्षा विवाद: नौकरी पर मंडराते संकट के बीच अभ्यर्थियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया

झारखंड परीक्षा विवाद: नौकरी पर मंडराते संकट के बीच अभ्यर्थियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया
Modified Date: August 20, 2026 / 05:03 pm IST
Published Date: August 20, 2026 5:03 pm IST

रांची, 20 अगस्त (भाषा) झारखंड में हाल ही में भर्ती परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले करीब 2,700 अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को यहां प्रदर्शन किया। उन्होंने 22 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश से संबंधित अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग की।

उन्होंने राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि उन्होंने ये परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से पास की हैं और उसी के आधार पर उन्हें सरकारी नौकरियां मिली हैं।

सरकार के ये आदेश भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के 25 दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच आए हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने बताया, “करीब 2,700 लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इनमें लगभग 2,000 अभ्यर्थी वे हैं, जिन्हें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) के जरिए सरकारी नौकरी मिली है। हम इन आदेशों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले को झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं।

प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को भी प्रदर्शन किया था। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए झारखंड सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गए थे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे कथित अनियमितताओं की जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द किए जाने पर उन्हें आपत्ति है।

उन्होंने कहा कि कार्रवाई दोषी अभ्यर्थियों के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उन अभ्यर्थियों के खिलाफ जिनका चयन योग्यता के आधार पर हुआ है।

सरकारी खाद्य सुरक्षा अधिकारी चंदन कुमार साहू ने कहा, “खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में अब तक किसी तरह की अनियमितता की कोई शिकायत सामने नहीं आई है। इसके बावजूद हमें नौकरी से बाहर किया जा रहा है। यह न्याय नहीं है। जब तक हमें न्याय नहीं मिलता, हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।”

इस बीच, प्रदर्शन के कारण कई सरकारी विभागों का कामकाज प्रभावित हुआ।

आंदोलन कर रहे छात्रों ने बुधवार को 26 दिनों से जारी अपना धरना स्थगित कर दिया था और परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों का समाधान करने के लिए राज्य सरकार को दो महीने का समय दिया था।

भाषा तान्या संतोष

संतोष


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