झारखंड: लापता बच्चों के मामलों की जांच में कोई खास प्रगति न होने से परिजनों की उम्मीदें धूमिल
झारखंड: लापता बच्चों के मामलों की जांच में कोई खास प्रगति न होने से परिजनों की उम्मीदें धूमिल
रांची/कोडरमा, 29 जनवरी (भाषा) झारखंड के विभिन्न जिलों से बच्चों के लापता होने के महीनों बाद उनके परिजन जवाबों का इंतजार कर रहे हैं और पुलिस जांच में कोई खास सफलता न मिलने के कारण उनकी उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं।
हाल में चलाए गए मानव तस्करी विरोधी अभियानों के जरिए कई नाबालिगों को बचाया गया है, लेकिन इससे कोडरमा की सपना बिरहोरनी या बोकारो की रेखा देवी जैसी माताओं को कोई राहत नहीं मिली है और उनकी बेटियों का अब तक पता नहीं चल पाया हैं।
कोडरमा जिले में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के रूप में वर्गीकृत बिरहोर समुदाय की 35 वर्षीय सदस्य सपना बिरहोरनी अपनी तीन वर्षीय बेटी के लापता होने के सदमे से उबरने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
पिछले साल चार सितंबर को बच्ची के माता-पिता के काम के लिए जंगल चले जाने के बाद मार्काचो थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिरहोरी कॉलोनी में वह अपने घर से लापता हो गई थी।
पांच बच्चों की मां सपना ने कहा, ‘‘जब मैं दोपहर को घर लौटी तो मेरी बेटी वहां नहीं थी। हमने पूरी कॉलोनी में उसे ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली।”
मार्काचो थाने के प्रभारी नंद किशोर तिवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही बच्ची का पता लगा लेंगे और उसे बचा लेंगे।’’ उन्होंने कहा कि एक टीम ने हाल में रांची का दौरा किया था ताकि यह पता किया जा सके कि बच्ची उन 12 अपहृत बच्चों में तो शामिल नहीं है, जिन्हें रांची पुलिस ने 18 जनवरी को बचाया था।
उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, वह उनमें शामिल नहीं थी।’’
बोकारो जिले में भी इसी तरह 19 वर्षीय युवती पिछले साल जुलाई से लापता है।
उसकी मां रेखा देवी ने बताया कि वह अपनी बेटी की तलाश में इधर-उधर भटक रही हैं।
लंबे समय से लंबित एक अन्य मामला गुमला जिले से है जहां से छह वर्षीय एक बच्ची 2018 से लापता है। बच्ची का पता लगाने के लिए पुलिस के प्रयासों के विफल होने के बाद उसकी मां चंद्रमुनि उरैन ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया।
अदालत ने 21 जनवरी को गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को जांच की स्थिति पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हारिस बिन ज़मां ने अदालत को सूचित किया कि एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है और नाबालिग का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
इस बीच, झारखंड पुलिस ने बताया कि इस वर्ष राज्य के विभिन्न हिस्सों से 12 अपहृत बच्चों को बचाया गया है।
रांची पुलिस ने बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और उत्तर प्रदेश से अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।
भाषा यासिर वैभव
वैभव

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