झारखंड अपने स्वास्थ्य सेवा को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के आधार पर मजबूत करेगा : अधिकारी

झारखंड अपने स्वास्थ्य सेवा को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के आधार पर मजबूत करेगा : अधिकारी

झारखंड अपने स्वास्थ्य सेवा को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के आधार पर मजबूत करेगा : अधिकारी
Modified Date: March 23, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: March 23, 2026 8:15 pm IST

रांची, 23 मार्च (भाषा) झारखंड सरकार राज्य की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर काम कर रही है, ताकि विशिष्ट उपचार तक लोगों की पहुंच में सुधार किया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह ने ‘संगठनों के लिए दिशानिर्देश और गहन देखभाल सेवाएं प्रदान करने’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत, रांची के राजेंद्र आयुर्वेद संस्थान (रिम्स) और जिलों के सदर अस्पतालों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चार प्रमुख जिला अस्पतालों को पहले ही टेली-आईसीयू नेटवर्क के माध्यम से रिम्स से जोड़ा जा चुका है।

‘हब एंड स्पोक’ मॉडल एक ऐसा संगठनात्मक या परिचालन ढांचा है, जहां सारा काम एक केंद्रीय केंद्र (हब) के माध्यम से किया जाता है, जो कई छोटे सहायक केंद्रों (स्पोक्स) से जुड़ा होता है।

सिंह ने कहा,‘‘भविष्य में, अन्य जिलों के निजी अस्पतालों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श मिल सके।’’

उन्होंने कहा कि वर्तमान में टेली-आईसीयू नेटवर्क से खूंटी, गुमला, लातेहार और रांची के जिला अस्पताल जुड़े हुए हैं।

सिंह ने कहा कि राज्य में वर्तमान में अस्पतालों में लगभग 28,000 बिस्तर हैं, जो सरकारी और निजी सुविधाओं के बीच समान रूप से विभाजित हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मानदंडों के अनुसार, कुल बिस्तरों में से लगभग 15 प्रतिशत, यानी लगभग 4,200, आईसीयू बिस्तर होने चाहिए। हालांकि, वर्तमान में 1,000 से भी कम आईसीयू बिस्तर उपलब्ध हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए अगले तीन से चार वर्षों के लिए एक खाका तैयार किया गया है।’’

सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप अस्पताल के बिस्तरों की कुल संख्या को बढ़ाकर लगभग 60,000 करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में 18 जिलों के अस्पतालों में आईसीयू बेड की भारी कमी है।

सिंह ने कहा, ‘‘इस समस्या के समाधान के लिए, रिम्स के समन्वय से तकनीकी कर्मियों को वेंटिलेटर संचालन और आईसीयू प्रबंधन में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।’’

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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