झारखंड के युवक ने मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए बनाया कम लागत वाला एआई उपकरण
झारखंड के युवक ने मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए बनाया कम लागत वाला एआई उपकरण
रांची, 17 जुलाई (भाषा) झारखंड के 18 साल के लड़के ने राज्य के वन विभाग के लिए, खासकर ग्रामीण इलाकों में इंसान और हाथियों के बीच टकराव को कम करने के मकसद से कम लागत वाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरण बनाया है। यह जानकारी शुक्रवार को एक अधिकारी ने दी।
उन्होंने कहा कि इस उपकरण का अभी पलामू बाघ अभयारण्य (पीटीआर) में परीक्षण किया जा रहा है और अगस्त में इसे रांची जिले में प्रायोगिक परियोजना के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है।
रांची के एक स्कूल से हाल ही में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास करने वाले अवि मोहन कुमार शुक्ला ने बताया कि वह पिछले तीन महीनों से इस परियोजना पर काम कर रहे हैं।
अवि ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, “ ‘इनोबॉक्स’ नाम का यह उपकरण सौर ऊर्जा चालित एआई आधारित वन्यजीव निरोधक उपकरण है। यह उपकरण कंपन संवेदी, रडार और एआई कैमरे का इस्तेमाल करके हाथियों और दूसरे जानवरों का पता लगाता है तथा उन्हें खेतों से दूर रखता है। इसमें अलग-अलग प्रजातियों की पहचान करने की सटीकता 80-85 प्रतिशत से ज्यादा है।”
रांची निवासी व्यापारी आशीष कुमार शुक्ला के बेटे अवि ने जब उपकरण के विकास की जानकारी दी, तो वन विभाग ने परियोजना के लिए खर्चा उठाया।
झारखंड के मुख्य वन्यजीव वार्डन रवि रंजन ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, “सोशल मीडिया पर अवि को देखने के बाद, मैंने उन्हें फोन किया और उनकी प्रस्तुति को देखा। वन विभाग ने ऐसे 10 एआई-आधारित उन्नत उपकरण बनाने के लिए एक लाख रुपये दिए हैं। ये उपकरण अभी परीक्षण के दौर में हैं। हमने उन्हें अंतिम परीक्षण के लिए पलामू बाघ अभयारण्य भेजा है, जहां अब तक 80-85 प्रतिशत सटीकता के साथ अच्छे नतीजे मिले हैं।”
उन्होंने कहा कि परीक्षण पूरा होने के बाद, इन उपकरणों का इस्तेमाल रांची ज़िले में प्रायोगिक परियोजना के तौर पर किया जाएगा, जिसकी संभावना अगस्त में है।
रंजन ने कहा, “अगर यह सफल रहा, तो इन्हें पूरे राज्य में लगाया जाएगा, क्योंकि इन उपकरणों की कीमत कम है।”
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
नेत्रपाल

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