श्रीनगर, 16 सितंबर (भाषा) जम्मू कश्मीर विधानसभा के संक्षिप्त शरद सत्र को लेकर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निशाने पर आए विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने बुधवार को कहा कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू कश्मीर में विधानसभा की औसत बैठकें प्रति वर्ष सबसे अधिक होती हैं।
राथर भाजपा विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने आगामी विधानसभा सत्र की अवधि कम रखी है क्योंकि वह लोगों के मुद्दों के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है।
राथर ने विधानसभा के शरद सत्र से पहले संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष को इस तरह के बयान देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में प्रति वर्ष औसतन 28 बैठकें होती हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 24 है।’
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरद सत्र 21 से 30 सितंबर तक श्रीनगर में आयोजित किया जाना है।
शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा का एक महीने का सत्र आहूत करने की मांग की थी ताकि सदन में जनता के मुद्दे उठाए जा सकें। शर्मा ने जम्मू में पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘दुर्भाग्य से, जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपनी विधायी जवाबदेही लगभग पूरी तरह खो दी है। विधानसभा एक मजाक बनकर रह गई है।’
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शरद सत्र आमतौर पर छोटा रहा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा शासित राज्यों की विधानसभाओं में सत्र इससे भी कम अवधि के होते हैं।
राथर ने कहा, ‘असम में एक दिन का सत्र हुआ, राजस्थान में दो दिन का सत्र हुआ और गुजरात, दिल्ली एवं गोवा में तीन-तीन दिन के सत्र हुए। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पांच दिन के सत्र हुए। ये सभी भाजपा शासित राज्य हैं। इसलिए नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा सत्र को मजाक कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार में शासन किया था, तब भी शरद सत्र छोटा ही रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘2015 में शरद सत्र चार अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चला था, जबकि 2017 में यह जुलाई में केवल चार दिनों के लिए आयोजित किया गया था।’
विधानसभा अध्यक्ष ने मीडिया से यह भी अपील की कि वह सदन में विधायकों द्वारा हंगामा किए जाने को कम तवज्जो दे, ताकि सत्र सुचारू रूप से चलाने में मदद मिल सके।
उन्होंने कहा, ‘पीठासीन अधिकारी निश्चित रूप से उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे-यह उनकी जिम्मेदारी है लेकिन आपकी जिम्मेदारी इससे भी बड़ी है। जो लोग हंगामा करते हैं, कानून अपने हाथ में लेते हैं और नियमों का कोई सम्मान नहीं करते-कृपया उनके बारे में कम लिखें।’
राथर ने पत्रकारों से सदस्यों के भाषणों की गुणवत्ता और उनके विधायी प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘जो भी सदस्य अच्छा प्रदर्शन करता है, उसे अधिक कवरेज दें। इससे हमें सदन को सभ्य और व्यवस्थित तरीके से चलाने में मदद मिलेगी; यह वास्तव में हमारे लिए सहायक होगा। एक सदस्य को यह महसूस होना चाहिए कि यदि वह नियमों, संविधान और कानून का सम्मान करता है तो ही उसे अधिक कवरेज मिलेगा। यह धारणा और यह संदेश सभी माननीय सदस्यों, यहां तक कि हर मंत्री तक भी पहुंचना चाहिए।’
राथर ने कहा कि इस मुद्दे पर उनके अनुभव इसके विपरीत रहे हैं।
भाषा अमित नरेश
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