पत्रकार-लेखक नरेश कौशिक के उपन्यास में ‘शान की खातिर हत्या’ के खिलाफ संघर्ष की कहानी बयां की गई
पत्रकार-लेखक नरेश कौशिक के उपन्यास में ‘शान की खातिर हत्या’ के खिलाफ संघर्ष की कहानी बयां की गई
नयी दिल्ली, नौ मई (भाषा) पत्रकार-लेखक नरेश कौशिक के नये हिंदी उपन्यास में कन्या भ्रूणहत्या, लैंगिक उत्पीड़न और शान की खातिर हत्या के खिलाफ संघर्ष जैसे विषयों को पेश किया गया है।
राजपाल एंड संस द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘‘जिंदा रहणे की जिद’’ में दुर्गा नामक एक दृढ़ निश्चयी युवती के जीवन की कहानी बयां की गई है, जिसमें वह एक ऐसे रूढ़िवादी सामाजिक ढांचे से लड़ती है जो महिलाओं के दमन और उन्हें शिक्षा व सम्मान से वंचित करने के लिए बनाया गया है।
जन्म के कुछ ही क्षणों बाद दुर्गा को उसके पिता रामधारी द्वारा जिंदा दफना दिया जाता है। फिर भी, मिट्टी के ढेर के नीचे वह घंटों तक जीवित रहती है, जो उसकी सहनशीलता का प्रारंभिक प्रमाण और एक गहरे पितृसत्तात्मक समाज के खिलाफ दुनिया में अपना स्थान पाने के लिए उसके द्वारा लड़ी जाने वाली लड़ाइयों की शुरुआत होती है।
कौशिक ने बताया कि अपने परिवार में इसी तरह की घटना देखने के बाद उन्हें यह कहानी लिखने की प्रेरणा मिली।
लेखिका ने कहा, ‘‘मेरी एक करीबी रिश्तेदार के साथ हुई इस घटना पर मेरे परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रिया ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया… मेरे मन में यह सवाल उठ रहा था कि मेरे अपने लोग इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं? इसी उथल-पुथल से प्रेरित होकर मैंने दुर्गा के संघर्ष को शब्दों में पिरोया।’’
‘‘जिंदा रहणे की जिद’’ में दुर्गा को एक संवेदनशील बच्ची के रूप में दिखाया गया है जो परिवार में लड़कों और लड़कियों के बीच होने वाले भेदभाव पर सवाल उठाती है, क्योंकि लड़कियों को पढ़ाई से हतोत्साहित किया जाता है।
समय के साथ भेदभाव और भी गहरा होता जाता है क्योंकि बड़ा परिवार दुर्गा की उच्च शिक्षा का विरोध करता है, जहां उसे प्रदीप नाम के एक अलग जाति के युवक से प्यार हो जाता है।
परिवार के विरोध के बावजूद, दुर्गा अपनी पसंद के युवक के साथ अपनी मनचाही जिंदगी जीने का प्रयास करती है। जैसे-जैसे उसके आसपास परिस्थितियां बदतर होती हैं, दुर्गा हत्याओं की गवाह बनती है, यौन हिंसा का शिकार होती है और अपने परिवार द्वारा उसे जान से मारने के सामूहिक फैसले से बच निकलती है।
नरेश कौशिक ‘पीटीआई-भाषा’ में कार्यरत हैं।
अपनी पिछली रचना ‘‘रब्बी’’ में, कौशिक ने 11 लघु कहानियों के माध्यम से सांप्रदायिक तनाव, यौन हिंसा, प्रवासन और सामाजिक संबंधों जैसे विषयों को गहराई से पेश किया था।
भाषा
शफीक माधव
माधव

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