जेयू के कुलपति ने दी दीवारों पर नारे लिखने से बचने की सलाह, सोशल मीडिया पर छात्रों से मांगी राय
जेयू के कुलपति ने दी दीवारों पर नारे लिखने से बचने की सलाह, सोशल मीडिया पर छात्रों से मांगी राय
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, दो सितंबर (भाषा) यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य ने परिसर में दीवारों पर कुछ भी लिखने से बचने और छात्रों से सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने की अपील की है।
भट्टाचार्य ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों को परिसर को स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण बनाए रखते हुए संस्थान की स्वतंत्र विचार और अभिव्यक्ति की पुरानी परंपरा को बरकरार रखना चाहिए।
कुलपति ने एक खुले पत्र में कहा कि उनके सुझावों का मकसद अभिव्यक्ति की आजादी को रोकना नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की विरासत और माहौल को बचाना है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुछ दिन पहले यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर से कथित देश-विरोधी नारे हटाने का निर्देश दिया था जिसके बाद भट्टाचार्य की ये टिप्पणी सामने आई है। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दीवारों पर लिखे विवादित नारों को सफेद रंग से पेंट करा दिया था। हालांकि परिसर की दीवारों पर फिर से नए नारे लिख दिए गए हैं।
उन्होंने खुले पत्र में कहा, ‘‘यादवपुर विश्वविद्यालय में आजाद सोच और अभिव्यक्ति की एक लंबी परंपरा रही है। हमें इस विरासत को बचाए रखना चाहिए और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि परिसर साफ, शांतिपूर्ण और देखने में सुंदर बना रहे।’’
संपर्क किए जाने पर भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि छात्रों को विश्वविद्यालय की दीवारों पर नारे लिखने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और विश्वविद्यालय के भौतिक माहौल एवं शैक्षणिक वातावरण को बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के कला संकाय में दीवारों पर लिखे नारों की पिछले सप्ताह आलोचना की थी और परिसर में ‘किशनजी को लाल सलाम’ और ‘कश्मीर आजादी चाहता है’ जैसे नारों पर सवाल उठाए थे।
किशनजी एक बड़ा माओवादी नेता था जिसे 2011 में पुलिस ने मार गिराया था। यह घटना पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के कुछ महीनों बाद हुई थी।
अधिकारी ने ऐसे नारों को आपत्तिजनक बताते हुए उनकी तुलना ‘‘कचरे’’ से की थी। उन्होंने कहा था कि यादवपुर विश्वविद्यालय जैसे ‘‘उत्कृष्ट संस्थान’’ में इस तरह की संस्कृति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
भाषा सुरभि मनीषा
मनीषा

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