‘जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला जंगल का कानून’ पुराने सिद्धांतों की जगह ले रहा है: थरूर

‘जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला जंगल का कानून’ पुराने सिद्धांतों की जगह ले रहा है: थरूर

‘जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला जंगल का कानून’ पुराने सिद्धांतों की जगह ले रहा है: थरूर
Modified Date: January 7, 2026 / 08:34 pm IST
Published Date: January 7, 2026 8:34 pm IST

तिरुवनंतपुरम, सात जनवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हाल में अमेरिका द्वारा पकड़े जाने पर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि ‘‘जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला जंगल का कानून’’ उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पुराने सिद्धांतों की जगह लेता दिख रहा है।

थरूर ने कहा कि वह पूरी तरह से निजी हैसियत से, इस मुद्दे के संबंध में हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों से बहुत चिंतित हैं।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर विशेष रूप से सदस्य देशों की संप्रभुता, सीमाओं के उल्लंघन नहीं करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को निपटाने के लिए बल के इस्तेमाल की अस्वीकार्यता का उल्लेख करता है।

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संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष थरूर ने यहां आयोजित केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (केआईएलबीएफ) के चौथे संस्करण के मौके पर पत्रकारों से कहा, ‘‘इन सभी का इस घटना में उल्लंघन किया गया है।’’

थरूर ने कहा कि स्थिति ‘‘सैन्य रूप से लंबी तो नहीं खिंची’’, क्योंकि वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति अंतरिम राष्ट्रपति बन गए और उस देश में ‘‘सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश की जा रही है’’, फिर भी वहां स्थिति तनावपूर्ण है क्योंकि सड़कों पर दमन की और लोगों की गिरफ्तारी की खबरें आ रही हैं।

कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘अब हम किसी आक्रमण के बारे में बात नहीं कर सकते क्योंकि जो लोग आए थे, वे चले गए हैं। अब, दूसरी बात यह है कि कुछ मकसद बताए जा रहे हैं और कुछ चीजों का दावा किया जा रहा है, जो कुछ हद तक अप्रिय हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अब, मुझे नहीं लगता कि हमारे लिए इतनी दूर बैठकर उन मामलों पर फैसला सुनाना उचित है जो बहुत पहले हुए थे। लेकिन मुझे लगता है कि भारतीयों को यह समझना चाहिए कि देश के प्राकृतिक संसाधन देश के हैं। किसी भी देश के संसाधन उसी के होते हैं, और उन संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह उस देश के प्रतिनिधियों का अधिकार होना चाहिए।’’

जब संवाददाताओं ने उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्यूबा और ग्रीनलैंड के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की कथित घोषणा के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि तथाकथित उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पुराने सिद्धांतों की जगह ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाला जंगल का कानून ले रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पुरानी विश्व व्यवस्था ने एक नई विश्व अव्यवस्था को जन्म दिया है।’’

जब संवाददाताओं ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप से मुलाकात के लिए सहमति जता दी है, तो थरूर ने कहा कि हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे पहले ध्यान में रखता है।

थरूर ने कहा, ‘‘मेरे लिए, उन राष्ट्रीय हितों का मतलब है कि हम कहीं भी अपने लिए बड़े दुश्मन या बड़ी समस्याएं पैदा नहीं करना चाहते हैं, और हम जहां तक संभव हो सके, सभी के साथ बातचीत के रास्ते बनाए रखना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपने लेखन में, मैंने इस बहुआयामी रुख का समर्थन किया है जहां हमारे रूस के साथ अच्छे संबंध हैं, चीन के साथ ठीक-ठाक संबंध हैं, अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं, यूरोप के लिए रास्ते खुल रहे हैं, अफ्रीका में नए रास्ते विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि के साथ स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।’’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि ये सभी चीजें हमारे विकल्पों को अधिकतम करने की नीति का हिस्सा रहीं।

उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार संयुक्त राष्ट्र चार्टर का समर्थन किया है और इसलिए, वेनेजुएला में जो हुआ, वह ‘‘दलगत राजनीति से परे कई भारतीयों को परेशान करता है’’।

थरूर ने कहा, ‘‘मेरी पार्टी ने पहले ही कड़ा बयान जारी किया है। मैं इसे दोहराऊंगा नहीं। और यह एक बहुत मजबूत और स्पष्ट शब्दों वाला बयान है। जहां तक भारत सरकार की बात है, उनकी अपनी बाध्यताएं हैं, और अक्सर विदेश मंत्रालय जो नहीं कहने का विकल्प चुनता है, वह अक्सर उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना वे कहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘…कूटनीति में, कुछ रिश्तों पर बातचीत करने में चुनौतियां होती हैं।’’

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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