न्यायमूर्ति धूलिया समिति बीसीआई चुनाव में महिला सदस्यों के संबंध में नियम बनाए : न्यायालय

न्यायमूर्ति धूलिया समिति बीसीआई चुनाव में महिला सदस्यों के संबंध में नियम बनाए : न्यायालय

न्यायमूर्ति धूलिया समिति बीसीआई चुनाव में महिला सदस्यों के संबंध में नियम बनाए : न्यायालय
Modified Date: April 13, 2026 / 05:45 pm IST
Published Date: April 13, 2026 5:45 pm IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव पर्यवेक्षण समिति यह निर्धारित करेगी कि 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के अनिवार्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्य बार काउंसिल चुनावों में महिला उम्मीदवारों को किस प्रकार समायोजित किया जाना है।

दिसंबर 2023 में, न्यायालय ने आदेश दिया था कि राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व निर्धारित किया जाए। निर्वाचित होने वाली महिलाओं की संख्या अपर्याप्त रहने की स्थिति से निपटने के लिए न्यायालय ने 10 प्रतिशत सीट भरने के लिए ‘‘सह-विकल्प’’ व्यवस्था की अनुमति दी थी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने राज्य बार काउंसिल चुनावों और अन्य संबंधित मुद्दों की निगरानी के लिए न्यायमूर्ति धूलिया, न्यायमूर्ति रवि शंकर झा (पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि की उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव पर्यवेक्षण समिति का गठन किया था।

सोमवार को, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की सदस्यता वाली पीठ ने आरक्षण प्रावधानों के संभावित ‘‘दुरुपयोग’’ से संबंधित चिंताओं पर विचार करते हुए एक याचिका की सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ‘‘सह-विकल्प’’ के संबंध में स्पष्टता की कमी का गलत फायदा उठाया जा सकता है।

यह दलील दी गई कि सह-विकल्प संबंधी प्रावधान की गलत व्याख्या की जा रही है।

वरिष्ठ वकील डी.एस. नायडू ने कहा कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कई महिला उम्मीदवारों ने ‘‘खुली श्रेणी’’ में चुनाव लड़ा और अपने पुरुष प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए सीटें जीतीं।

नायडू ने दलील दी कि सह-विकल्प तभी अंतिम उपाय होना चाहिए जब कोई महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए उपलब्ध न हो।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका अनपेक्षित परिणाम यह है कि चुनाव लड़ने का साहस करने वाले लोग हाशिए पर धकेल दिए जा रहे हैं।’’

नायडू ने कहा कि असफल उम्मीदवारों के समूह में से चयन करने के बजाय बार काउंसिल को सह-चयन के लिए नामों की सिफारिश करने की अनुमति देने से ‘‘अव्यवस्था’’ उत्पन्न हो जाएगी।

प्रधान न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि 10 प्रतिशत सह-विकल्प के ‘‘तौर तरीके’’ के संबंध में न्यायालय के पिछले आदेश में अस्पष्टता के कारण वर्तमान विवाद उत्पन्न हुआ है।

पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति धूलिया समिति इन विकल्पों के गुण-दोषों का बखूबी मूल्यांकन कर सकती है।

न्यायालय ने कहा, ‘‘समिति से अनुरोध है कि वह सभी हितधारकों से परामर्श करने के बाद निर्णय ले।’’

भाषा सुभाष माधव

माधव


लेखक के बारे में