न्यायमूर्ति मोहना ने सांसदों-विधायकों के मामलों संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
न्यायमूर्ति मोहना ने सांसदों-विधायकों के मामलों संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. मोहना ने मंगलवार को 2016 की एक जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस याचिका में देश भर के जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
जैसे ही अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई शुरू की, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति मोहना पूर्व में इस मामले में वकील के तौर पर पेश हुई थीं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘मेरी बहन खुद को इससे अलग कर लेंगी… हम इसे दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता और अदालत मित्र विजय हंसारिया ने प्रधान न्यायाधीश से जल्द से जल्द एक पीठ गठित करने का आग्रह हुए मामले में तत्काल सुनवाई की ज़रूरत बताई।
राजनीति के अपराधीकरण पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट में हंसारिया ने कहा कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा के 233 सांसदों में से 75 के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के अनुरोध वाली जनहित याचिका में अदालत मित्र नियुक्त किए गए हंसारिया ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर किया। इसमें कहा गया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले हैं।
हलफ़नामे में कहा गया कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं। उनके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
दिलीप

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