कोलकाता, आठ सितंबर (भाषा) यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) ने राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की सुविधा के लिए विधानसभा में एक विधेयक लाने की पश्चिम बंगाल सरकार की योजना की मंगलवार को आलोचना की और इसे संस्थानों की स्वायत्तता पर हमला करार दिया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की सुविधा वाला विधेयक 10 सितंबर को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में पेश किया जाएगा।
जेयूटीए ने एक बयान में कहा, ‘‘यह विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और नौकरी की सुरक्षा पर सीधा हमला है।’’
जेयूटीए ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय के अपने नियम और कामकाज की प्रक्रियाएं हैं तथा इन्हीं के आधार पर संबंधित विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां की जाती हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘कर्मचारियों को पूरी तरह नई परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।’’
संघ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नई तबादला व्यवस्था का इस्तेमाल सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ किया जाएगा।
जेयूटीए ने कहा, ‘‘जिस तरह सरकार पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत करने का प्रयास कर रही है, उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।’’
शिक्षक संगठन ने शिक्षण संकाय की भूमिका को उच्च शिक्षण संस्थान की उत्कृष्टता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की तबादला व्यवस्था किसी भी राज्य, केंद्र स्तर या विदेश में मौजूद नहीं है।
जेयूटीए ने मांग की कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों पर ऐसी नई शर्तें लागू नहीं की जानी चाहिए, जो मौजूदा सेवा शर्तों के विपरीत हों।
भाषा अमित नरेश
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