चेन्नई, आठ सितंबर (भाषा) तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में 2024 में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों से जुड़े मामलों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. गोकुलदास की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई जिसमें इस घटना के लिए प्रशासनिक लापरवाही, समय पर खुफिया जानकारी न मिलना और सरकारी विभागों में व्यवस्थागत खामियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान सामने आया कि अवैध शराब बनाने और बेचने की शुरुआती चेतावनियों और स्पष्ट संकेतों के बावजूद, स्थानीय पुलिस और राजस्व अधिकारी एहतियाती कदम उठाने में विफल रहे।
तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले के करुणापुरम गांव में जून 2024 में जहरीली शराब पीने से 67 लोगों की मौत हो गई थी और 150 से अधिक गंभीर रूप से बीमार पड़े थे।
इस त्रासदी के बाद तत्कालीन द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार ने घटना की विस्तृत जांच के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त)गोकुलदास की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 20 नवंबर, 2024 को इस घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का आदेश दिया जिसे उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा।
जांच आयोग ने पुलिस, मद्यनिषेध इकाई (पीईडब्ल्यू)और राजस्व विभागों की गंभीर चूक को उजागर करते हुए इस त्रासदी के लिए शराबबंदी और आबकारी विभाग, नियमित पुलिस बल और स्थानीय राजस्व प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट में कल्लाकुरिची, शंकरपुरम और काचिरापलयम पुलिस थानों में तैनात कर्मियों, तिरुकोइलुर पीईडब्ल्यू के उप निरीक्षकों और निरीक्षकों, साथ ही स्थानीय ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों, ग्राम सहायकों, राजस्व निरीक्षकों और तहसीलदारों की जिम्मेदारी तय की गई है।
आयोग ने मई 2023 और 19 जून 2024 के बीच इन पदों पर काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ संबंधित सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की।
आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े विधायी और प्रशासनिक सुधारों की मांग की और मेथनॉल के भंडारण, परिवहन और उपयोग को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए कानून में संशोधन की सिफारिश की।
त्रासदी के पीछे के सामाजिक-आर्थिक कारणों को समझते हुए, रिपोर्ट में राज्य सरकार से कल्लाकुरिची में नए उद्योग स्थापित करने का आग्रह किया गया, ताकि शिक्षित, कुशल और अकुशल युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत