कामदुनी दुष्कर्म-हत्या मामला: पीड़िता के परिजन मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे
कामदुनी दुष्कर्म-हत्या मामला: पीड़िता के परिजन मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे
कोलकाता, 15 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के कामदुनी में 2013 में हुए बलात्कार एवं हत्या मामले की पीड़िता के परिवार के सदस्य राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के ‘जनता दरबार’ कार्यक्रम में बुधवार को शामिल हुए।
इससे कुछ दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने 13 वर्ष पुराने इस मामले की फाइलें दोबारा खोलने की बात कही थी।
कामदुनी की घटना के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा रहीं टुम्पा कोयल और मौसमी कोयल भी पीड़िता के परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिलीं।
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘जनता दरबार के दौरान मिले आवेदनों पर उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।’’
शुभेंदु अधिकारी विभिन्न मुद्दों पर लोगों की शिकायतें सुनने और अधिकारियों को उनका शीघ्र समाधान करने का निर्देश देने के लिए ‘जनता दरबार’ आयोजित कर रहे हैं। इस तरह का पहला साप्ताहिक कार्यक्रम 18 मई को हुआ था। शुभेंदु ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद इस पहल की घोषणा करते हुए कहा था कि नागरिक हर सप्ताह उनसे सीधे मिल सकेंगे।
उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी में 2013 में कॉलेज से घर लौट रही एक छात्रा को खेत में घसीटकर ले जाया गया था, जहां उससे सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। उसका क्षत-विक्षत शव अगली सुबह मिला था। इस घटना से राज्य में भारी आक्रोश फैल गया था।
एक सत्र अदालत ने तीन वर्ष बाद इस मामले में तीन आरोपियों को मौत की सजा और तीन अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मृत्युदंड पाने वाले तीन में से दो दोषियों की सजा को बाद में उम्रकैद में बदल दिया था और तीसरे दोषी को बरी कर दिया था। अदालत ने उम्रकैद का दंड पाने वाले तीन अन्य दोषियों की सजा भी कम कर दी थी।
अधिकारी ने आरोप लगाया था कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार उच्चतम न्यायालय में न्याय की लड़ाई लड़ रहे पीड़िता के परिवार का ‘‘विरोध’’ कर रही थी। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार परिवार को कानूनी सहायता मुहैया कराकर उसकी मदद करेगी।
पीड़िता के परिवार ने यह आरोप लगाते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था कि उसे न्याय नहीं मिला। यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार अदालतों के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्य रखने में विफल रही और पुलिस ने मामले की उचित जांच नहीं की।
कामदुनी घटना के बाद राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलाके का दौरा किया था जहां उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बनर्जी ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों में माओवादी भी शामिल थे। उनके इस बयान की कड़ी आलोचना हुई थी।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा

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