कानपुर किडनी प्रतिरोपण गिरोह: पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया

कानपुर किडनी प्रतिरोपण गिरोह: पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया

कानपुर किडनी प्रतिरोपण गिरोह: पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया
Modified Date: April 6, 2026 / 04:16 pm IST
Published Date: April 6, 2026 4:16 pm IST

कानपुर (उप्र), छह अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुर्दा प्रतिरोपण में लिप्त गिरोह से कथित तौर पर जुड़े एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

इससे पहले पुलिस ने संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय संबंध रखने वाले इस बड़े गिरोह का खुलासा किया था जिसमें अयोग्य चिकित्सक भी शामिल हैं।

कानपुर पुलिस के आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि उन्होंने कानपुर, लखनऊ, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद के स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन भी शामिल हैं जो सर्जरी में सहायता करने और उपकरण की व्यवस्था करने में शामिल थे।

लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह में मुख्य संदिग्ध परवेज उर्फ ​​सैफी, जो मेरठ का निवासी है, को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

लाल ने बताया कि कन्नौज निवासी रोहन, जो कथित तौर पर ‘मेडलाइफ अस्पताल’ का संचालक है, को शहर न छोड़ने और आवश्यकता पड़ने पर जांच में सहयोग करने के निर्देश के साथ छोड़ दिया गया है। रोहन को चार अप्रैल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी।

जांच में दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल और हरियाणा सहित कई राज्यों में इसके संबंध सामने आए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि विदेशी नागरिकों ने भी अवैध प्रक्रियाओं का लाभ उठाया होगा।

आयुक्त ने बताया कि भूपेंद्र का पता लगाने के लिए दो पुलिस टीम भेजी गई हैं, जिसने कथित तौर पर स्नातक होने के बावजूद खुद को एमडी उपाधि धारक चिकित्सक के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा कि भूपेंद्र अपने सहयोगी रोहित के साथ लखनऊ में ‘यूनाइटेड हॉस्पिटल’ के नाम से 30 बिस्तरों वाला अस्पताल चलाता था।

लाल ने बताया कि कथित बिचौलिए शिवम अग्रवाल के फोन से बरामद कई वीडियो और चैट से इस ऑपरेशन की व्यापकता और मनमानी का पता चलता है।

उन्होंने बताया कि एक वीडियो क्लिप में कथित तौर पर अफजल को लगभग 15 लाख रुपये की नकदी के बंडलों पर लेटे हुए दिखाया गया है।

उन्होंने बताया कि पुलिस टीमों को अफजल का पता लगाने और धन बरामद करने के लिए मेरठ और गाजियाबाद भेजा गया है।

एक अन्य क्लिप में अरेबिका नाम की एक दक्षिण अफ्रीकी महिला एक निजी अस्पताल में प्रतिरोपण के बाद परेशान दिखाई देती है, जहां जेल में बंद एम्बुलेंस चालक अग्रवाल स्टेथोस्कोप से उसकी जांच करता दिख रहा है। इससे चिकित्सा में लापरवाही बरते जाने का गंभीर संदेह पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस अरेबिका और अन्य विदेशी मरीजों का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिन्हें इलाज के लिए भारत बुलाया गया होगा।

एक अलग वीडियो में, अमृतसर के तरन-तारन निवासी मरीज मंजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि उसने प्रतिरोपण के लिए 43 लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सब कुछ खो दिया है… मुझे जीने का कोई आधार नहीं दिखता।’’ उनकी यह वेदना यह रेखांकित करती है कि गिरोह के कृत्यों की कीमत लोगों को चुकानी पड़ी है।

पुलिस ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल है, से 9-10 लाख रुपये में गुर्दे खरीदे जाने के सबूत मिलने के बाद, दानदाताओं और बिचौलियों की पहचान करने के लिए एक टीम नेपाल भी भेजी गई है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह दिल्ली, लखनऊ और गाजियाबाद के अस्पतालों तक फैला है और प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि प्रतिरोपण प्रक्रियाओं में तकनीशियनों और ऑपरेशन थिएटर सहायकों सहित अयोग्य कर्मियों की संलिप्तता है।

पुलिस ने बताया कि रोहित और अफजल सहित फरार आरोपियों की तलाश दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में की जा रही है।

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एसएम कासिम आबिदी ने कहा कि दाता-प्राप्तकर्ता के बीच सौदे टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया मंच के माध्यम से किए गए थे, जहां आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को पैसे का लालच दिया गया था।

कथित तौर पर कई साझेदारों द्वारा संचालित मेडलाइफ अस्पताल को खुलासे के बाद बंद कर दिया गया है।

अधिकारी अब अन्य निजी अस्पतालों की भूमिका की जांच कर रहे हैं जहां सर्जरी के बाद मरीजों को स्थानांतरित किया गया था।

लाल ने कहा, ‘नेटवर्क व्यापक और संगठित प्रतीत होता है। हम इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर रहे हैं।’

पुलिस ने कानुपर में 30 मार्च को पांच चिकित्सकों समेत छह लोगों की गिरफ्तारी के साथ किडनी प्रतिरोपण गिरोह का भंडाफोड़ किया था।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी के नेतृत्व में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम द्वारा कल्याणपुर क्षेत्र में मेड-लाइफ अस्पताल, आहूजा अस्पताल और प्रिया अस्पताल में (30 मार्च को) छापेमारी के बाद गिरफ्तारियां की गईं।

आयुक्त ने कहा कि आहूजा अस्पताल की मालिक डॉ. प्रीति आहूजा (50), उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (54) और चिकित्सक राजेश कुमार (44), राम प्रकाश (40) और नरेंद्र सिंह को गैरकानूनी रूप से अंग प्रतिरोपण की सुविधा प्रदान करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कथित मुख्य साजिशकर्ता शिवम अग्रवाल (32) को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसने कथित तौर पर खुद को एक डॉक्टर के रूप में पेश किया था।

प्रतिरोपण प्रक्रिया का हिस्सा रहे ओटी तकनीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब बिहार निवासी एक दानकर्ता आयुष (एमबीए छात्र) ने भुगतान विवाद को लेकर पुलिस से संपर्क किया। उसने शिकायत की कि उसे गुर्दे के लिए तय 10 लाख रुपये की राशि में से केवल 3.5 लाख रुपये मिले। गुप्त सूचना के बाद तत्काल छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू हो गईं।

भाषा सं जफर संतोष

संतोष


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