कानपुर (उप्र), 13 अप्रैल (भाषा) कानपुर पुलिस ने सोमवार को ऑनलाइन गेमिंग-आधारित घोटालों में शामिल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया और एक संगठित साइबर धोखाधड़ी और ‘‘डिजिटल अरेस्ट’’ रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके अंतरराष्ट्रीय लिंक होने का अंदेशा है। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्यम तिवारी (22), अनमोल विश्वकर्मा (30), नितिन गुप्ता (27), अभिषेक वर्मा (28), हितेश निगम (32), स्नेहित बजाज (24), सुल्तान अहमद (24) और नौशाद (31) के रूप में हुई है, जो कानपुर के निवासी हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बर्रा पुलिस और साइबर अपराध शाखा की संयुक्त टीम के इस ऑपरेशन ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जो ‘लोटस 365’, ‘रेड्डी बुक’, कार्तिकेय और दुबई एक्स जैसे प्रतिबंधित गेमिंग ऐप के ज़रिए लोगों को ठगता था।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर उपयोगकर्ताओं को जल्दी मुनाफे का वादा करके लुभाया और पैसे ऐंठे।
उन्होंने कहा कि इस गिरोह ने धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों को इधर-उधर करने और छिपाने के लिए कई बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया।
लाल के अनुसार तलाशी के दौरान, पुलिस को 26 मोबाइल फ़ोन, दो लैपटॉप, 54 एटीएम कार्ड, 24 पासबुक, एक चेक बुक और 30 सिम कार्ड मिले, जो तेलंगाना, पंजाब, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के खातों से जुड़े थे।
एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में पिछले तीन महीनों में लगभग 50 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है और इस रकम को ‘फ्रीज’ करने की कार्रवाई चल रही है।
पुलिस ने इस रैकेट में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 76 बैंक खातों का भी पता लगाया है, जिनमें कुल लेन-देन एक करोड़ रुपये से ज़्यादा होने का संदेह है।
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा लगता है कि यह नेटवर्क दुबई से संचालित हो रहा था, जिसके घरेलू लिंक नोएडा, मुंबई और लखनऊ में थे।
पुलिस के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं, जो अब भी फरार हैं।
भाषा सं आनन्द
राजकुमार
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