बेंगलुरु, 24 अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से तीन दिन पहले, सोमवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह कदम राज्य संचालित एक निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामले में घिरे मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के बढ़ते हंगामे के बीच उठाया गया।
विधानसभा का यह सत्र 13 अगस्त को शुरू हुआ था और इसे 27 अगस्त को समाप्त होना था।
राज्य संचालित निगम में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर रहे नागेंद्र को बर्खास्त करने की मांग को लेकर सदन के भीतर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को लगातार छठे दिन भी जारी रहा।
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने घोषणा की कि यदि मंत्री को तुरंत बर्खास्त नहीं किया गया, तो विपक्ष सदन के भीतर दिन-रात का धरना देगा।
विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने तख्तियां लेकर नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष जी. एस. पाटिल ने कार्यवाही का संचालन किया और कई विधेयकों को पारित करवाकर विधायी कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया।
सोमवार को हंगामे के बीच विधानसभा द्वारा बिना किसी चर्चा के कई विधेयक पारित किए गए जिनमें पार्क और उद्यान की भूमि के कुछ हिस्सों को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा जन उपयोगिता परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाला विधेयक भी शामिल है।
अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार द्वारा पेश की गई पूरक मांगों और उससे संबंधित विधेयकों को पारित कराने के बाद आखिर में सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
उधर विधान परिषद में भी मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का ऐसा ही जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद सभापति सलीम अहमद ने विधान परिषद की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
भाषा सुमित नरेश
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